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Air Pollution Essay-वायु प्रदूषण पर निबंध

वायु प्रदुषण (air pollution) पर चर्चा इसलिए अहम् हो जाती है क्योंकि विकास की आग से जलती दुनिया में अब शुद्ध हवाएं जिनपर पूरी तरह से सम्पूर्ण प्राणी  जगत निर्भर है , जिसके बिना मानव के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती  दिन ब दिन धीरे-धीरे तथा लगातार और अधिक विषाक्त  होती जा रही हैं।  वायु की विषाक्तता(poisonous air) की वजह से श्वास सम्बन्धी रोग विकराल रूप से फैलता जा रहा है और इन सबके द्वारा प्रकृति उस मानव जाति  को दण्डित करने की कोशिश कर रही है जिसने प्राकृतिक चक्र में व्यवधान उत्पन्न किया है। 

अतः हम सभी का यह दायित्व है कि हम वायु प्रदूषण पर अपने-अपने स्तर पर चर्चा करें तथा  समाज में इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाएं. स्कूल और कॉलेजों में इस विषय पर चर्चा वाद विवाद और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन हो ताकि पर्यावरण सुरक्षा के प्रति हमारा समाज जो पहले से ही जागरूक है और अधिक संवेदनशील बने। 

इस निबंध में हमने पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करने की कोशिश की है जो वायु प्रदूषण के बारे में आपके ज्ञान को थोड़ा बढ़ाएगी तथा इस विषय पर बात करने में आप खुद को  अधिक समर्थ अनुभव करेंगे।

क्या है वायु प्रदूषण (what is air pollution)? 
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वायु में अवांछित रासायनिक और जैविक कणों के मिश्रण को हम वायु प्रदुषण के नाम से जानते हैं ।  वायु में प्रदुषण के मुख्य तत्व हैं कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइडस तथा अन्य वाष्पशील हाइड्रोकार्बन ।इसके अलावा कार्बनिक अम्ल, बैक्टीरिया, वायरस, कीटनाशक आदि का प्रयोग भी वायु प्रदुषण के लिए जिम्मेदार है ।   इनमें से अधिकांश का उत्सर्जन मानवीय क्रिया कलापों से ही होता है। 

वातावरण के  शुद्ध वायुमंडलीय हवा में हानिकारक और विषैली गैसों का मिश्रण ही वायु प्रदूषण कहलाता है. आज से कुछ साल पहले तक हमें सांस लेने के लिए ताजी और शुद्ध हवा मिल जाया करती थी परंतु औद्योगिक विकास की अंधी दौड़ ने अब शुद्ध हवा की उपलब्धता पर भी एक बड़ा सा प्रश्न चिह्न लगा दिया है ? और दुनिया के कई बड़े शहरों में सरकारें अब Air Quality Index  के आधार पर यह बताती हैं कि उस स्थान विशेष की हवा प्राणियों के जीवित रहने हेतु कितना अनुपयुक्त है !

Main Source of Air Pollution वायु प्रदूषण के मुख्य घटक 

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image credit:Johannes Plenio

वायु प्रदूषण के मुख्य घटकों को हम उत्सर्जन के स्रोत के आधार पर दो भागों में बांट सकते हैं पहला मानवीय घटक तथा दूसरा प्राकृतिक घटक 

प्राकृतिक घटक में मुख्य रूप से ज्वालामुखी विस्फोट शामिल है जिसमें बड़ी मात्रा में लावा बाहर निकलता है साथ ही निकलते है बहुत सारे कार्बनिक गैस, धूल तथा धुआँ भी … ।  जिससे आसपास के वातावरण में मौजूद हवा श्वास लेने के लिए उपयोगी नहीं रह जाती है।  इसके अलावा जंगलों में लगने वाली आग भी वायु प्रदुषण के अहम् कारणों में से एक  है। 

वायु प्रदूषण के मानवीय कारणों में उद्योग तथा कल कारखानों से निकलने वाले हानिकारक गैसें एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ, वाहन, विद्युतीय ताप घर, लकड़ी पर खाना बनाना, फसलों को जलाना, कीटाणु नाशक का प्रयोग, धूम्रपान तथा कचरे और अपशिष्ट पदार्थों  का गलत ढंग से निस्तारण सबसे अहम कारण है ।

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इसके अलावा प्रदूषण को प्राथमिक(Primary) और द्वितीयक (Secondary) प्रदूषकों के आधार पर भी बांटा जा सकता है।   जहां जिन चीजों से प्रत्यक्ष रूप से वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है उसे हम प्राथमिक प्रदूषक की श्रेणी में रखते हैं तथा जो प्रकृति में मौजूद अन्य पदार्थों और कणों  से संयोग करने के बाद वायु को प्रदूषित करते हैं ऐसे प्रदूषकों को द्वितीयक प्रदूषक की श्रेणी में रखते हैं। 

प्रदुषण के कुछ मुख्य कारण 

कल कारखाने एवं उद्योग :-

18 वीं सदी में प्रारंभ हुई औद्योगिक क्रांति के साथ ही जहां मानव जीवन एक पैमाने पर विकास की ओर बढ़ने लगा वहीं दूसरी ओर इस औद्योगिकरण ने कार्बन जनित विभिन्न गैसों तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन करके वायु प्रदूषण की समस्या को लगातार गंभीर किया है। कल कारखानों से निकलने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन तथा अन्य कार्बनिक गैस ,धूल  तथा छोटे-छोटे अन्य रासायनिक कण  हवाओं की गुणवत्ता को बहुत ही नकारात्मक ढंग से प्रभावित करते हैं।  ऐसे क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को काफी स्वास्थ्य संबंधी  समस्याओं का, चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 

उद्योग में कपड़े से लेकर बिजली के लिए तापघर, यातायात के लिए गाड़ियों से लेकर  वायुयान बनाने तक के सभी काम आते हैं। स्पष्ट तौर पर कहें तो इन्हें बिलकुल बंद तो नहीं किया जा सकता लेकिन सुरक्षात्मक उपाय जरूर किये जा सकतें हैं ।

कृषि कार्य –

बढ़ती हुई जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए कृषि उत्पादन को बढ़ाना आवश्यक था तो हरित क्रांति के बाद दुनिया के विभिन्न देशों में उर्वरकों और कीटाणुनाशकों का उपयोग बहुत अधिक हो गया।  यह उर्वरक और कीटनाशक प्राकृतिक रूप से अपघटित  होने में काफी लंबा समय लेते हैं तथा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। 

खनन 

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खनन वह  प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम विभिन्न अयस्कों को मिट्टी के नीचे से बाहर निकालते हैं और फिर उनको प्रोसेस करके अपने उपयोग के लिए सामानों का निर्माण करते हैं।  खनन कार्यों  के लिए विस्फोटकों का उपयोग होता है तथा खनन की प्रक्रिया के दौरान छोटे-छोटे कण भी पर्यावरण को प्रदूषित  करते हैं. खदानों से निकलने वाली हानिकारक गैस और रेडियोधर्मी पदार्थों से वायु प्रदूषित होता है। इसके बाद जब रेडियोधर्मी अथवा अन्य चीजों को इन खदानों में डंप कर इनको भरा जाता है, तो डंप किये जाने वाले इन अपशिष्टों का  अपघटन भी वायु प्रदुषण का एक बड़ा कारण और चुनौती दोनों है। इसके अलावा अन्य कई कारणों को भी सूचीबद्ध किया जा सकता है ।

वायु प्रदूषण(air pollution) का मानव जीवन एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव 

समग्रता में वायु प्रदूषण(air pollution) का पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ता है लेकिन अगर हम मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की बात करें तो वायु प्रदूषण की वजह से हमारा स्वसन तंत्र प्रभावित होता है। श्वसन तंत्र के प्रभावित होने से कई प्रकार के अन्य रोग भी होते हैं जैसे कि अस्थमा,निमोनिया,ब्रोंकाइटिस,फेफड़ों में कैंसर तथा बड़े पैमाने पर होने वाले हृदयाघात में भी वायु प्रदुषण और खास कर नाइट्रोजन ऑक्साइड और लेड की बड़ी भूमिका है। 

दुनिया भर में किए गए विभिन्न सर्वे के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 70 से 80 लाख लोग वायु प्रदूषण की वजह से अकाल मौत के शिकार हो जातें हैं।  लगभग 4 से 8 लाख लोगों की मृत्यु समय से पहले हो जाती है। बच्चों तथा नवजात पर इसका बहुत ही ख़राब असर पड़ता है चूकि इनमें स्वसन तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। दूसरी ओर समय से पहले जनम के लिए भी वायु प्रदुषण एक कारण है । 

वायु प्रदूषण (air pollution) निवारण और नियंत्रण के उपाय 

वायु प्रदूषण पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती है इससे किसी भी प्रकार से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन इस समस्या से पूरी तरह निजात पाना भी संभव नहीं है ! रक्षात्मक कदमों को अपनाकर वायु प्रदूषण की समस्या को बहुत हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है । वह उपाय और सुरक्षात्मक कदम इस प्रकार से हैं :-

  1. कल कारखानों में नए मशीन तथा नई तकनीकी का उपयोग करना 
  2. धुआं  उत्सर्जित करने वाले संयंत्रों में चिमनियों  की ऊंचाई को बढ़ाना तथा उनमें फिल्टर के उपयोग को बाध्यकारी बनाना 
  3. औद्योगिक इकाइयों को आम शहरी अथवा ग्रामीण बसावट से दूर स्थापित करना 
  4. जंगलों की कटाई को नियंत्रित करना 
  5. वृक्षारोपण के प्रयासों को बढ़ावा देना 
  6. मजबूत केंद्रीकृत सरकारी परिवहन तंत्र की स्थापना करना
  7. वाहनों में डीजल इंजन को प्रतिबंधित करके कम उतसर्जन करने वाली तकनीक का प्रयोग करना  
  8. ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों के उपयोग करने पर जोर देना 
  9. अपशिष्ट एवं कचरा प्रबंधन के रीसाइक्लिंग तथा निपटारे के लिए सही व्यवस्था करना 
  10. पर्यावरण तथा वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक होकर काम करने वाली कंपनियों को लाभान्वित करना जो कि वैसे भी विश्व में शुरू हो चुका है और कार्बन क्रेडिट की बात हो रही है 
  11. वायु प्रदूषण अथवा प्रदूषण के प्रति अपनी भावी पीढ़ियों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कक्षाओं में एक विषय के रूप में प्रदूषण के कारण,प्रदुषण के प्रभाव  और निवारण की पढ़ाई को अनिवार्य कर देना  

वैसे तो भारत सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण(pollution control) के लिए कुछ काम किए हैं और कुछ नियम कानून भी बनाए हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जहां गरीबों की संख्या ज्यादा है। प्रदूषण के कुप्रभाव से सबसे ज्यादा प्रभावित भी गरीब ही होते हैं इसे और शक्ति से लागू करने की जरूरत है ताकि पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ हम अपने देशवासियों को भी गंभीर शारीरिक और आर्थिक नुकसान से बचा पाएं । 

उम्मीद है यह निबंध (air pollution essay) आपको पसंद आया होगा हमने पूरी प्रमाणिकता से तथ्यों को रखने की कोशिश की है किसी विषय अथवा त्रुटि पर अपने विचार हम तक कमेंट बॉक्स में लिख कर जरूर भेजें ! 

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