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सफलता में भाग्य की भूमिका |Success and Luck

सफलता

आज इस लेख सफलता में भाग्य की भूमिका में पढिए सफलता और भाग्य के संबंधों (Relation between Success and Luck) के बारे में .. समाज चाहे कोई भी क्यों न हो ? मानव मन लगभग एक जैसे ही सोचता है । सफलता मानव जाति और मानव मन के लिए कुतूहल का विषय रहा है । सफलता नितांत रूप से एक व्यक्तिगत विषय है और इसके मायने हरेक व्यक्ति के लिए देश काल और परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है । 

जब हम सफल लोगों के बारे में पढ़ते सुनते और देखते हैं, तो स्वाभाविक है कि हमारे मन में उनकी सफलता के कारण और रहस्य को जानने की जिज्ञासा भी उत्पन्न हो और ये होता भी है ।

सफल व्यक्तियों के प्रचारित गुण

प्रायः जितने भी मीडिया के तंत्र हैं जिनके द्वारा हम तक ये कहानियाँ पहुँचती हैं । उनके द्वारा सफलता (safalta) का पूर्ण श्रेय उस व्यक्ति विशेष के व्यक्तिगत गुणों को दिया जाता है और ये प्रचारित गुण हैं – मेहनत , प्रतिभा , दूरदृष्टि , विकासवादी सकारात्मक मानसिकता , संभावनाओं और अवसरों को परखने का गुण , भावनात्मक बुद्धिमत्ता आदि आदि …!

व्यक्ति के इन गुणों का उसकी कामयाबी में निश्चित ही अहम भूमिका होती है लेकिन इसके आलवे भी कुछ है जो कामयाबी के लिए और खास कर बड़ी कामयाबी के लिए आवश्यक है । 

सफलता

सफलता और भाग्य

बहुत सी चीजों का अवलोकन और ढेरों सफलता की कहानियाँ पढ़ने के बाद आज शायद ये कहने में हमें कोई संकोच नहीं है कि financial trading, business, sports, art, music, literature, तथा science… आदि सभी क्षेत्रों में बड़ी सफलता के लिए समुचित संसाधन की उपलब्धता के साथ अवसर और भाग्य की भूमिका भी निर्णायक है । 

भगवान कृष्ण भी गीता के दूसरे अध्याय में कहते हैं –

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।2.47।।

उनके अनुसार व्यक्ति का अधिकार केवल कर्म पर है । इंसान केवल दो चीजों ही  कर सकता है – पहला प्रयत्न और दूसरा प्रतीक्षा । प्रयत्नों का परिणाम सदैव हमारे अनुकूल हो ये कदापि संभव नहीं !

यदि हमारे सभी प्रयासों का परिणाम हमेशा हमारे मनोनुकूल हो और संभावित परिणामों का आभास हमें पहले से हो,हमें पहले ही पता हो , तो शेष जीवन शायद रसहीन हो जाएगा । 

लोगों की आमदनी , करियर में विकास , धन का आना और जाना , स्वास्थ्य खराब हो जाना आदि सभी घटनाओं में किसी न किसी प्रकार से भाग्य की एक भूमिका तो है !

संसार में ऐसी बहुत सी घटनाएं होती हैं जिसे खुद को प्रचंड वैज्ञानिक सोच और तर्क का धुरंधर मनाने वाला व्यक्ति भी तर्क की कसौटी पर कस पाने में असमर्थ अनुभव करता है । उन घटनाओं के पीछे कोई कारण नहीं ढूंढ पाता !

एक सामान्य सामाजिक धारणा है कि जो अधिक योग्य है वही अधिक सफल भी होगा । तभी अमूमन लोग बच्चों को अधिक पढ़ने अधिक मेहनत करने आदि आदि के बारे में बताते हैं । 

मेहनत  से परिणाम मिलते हैं ये सच है , लेकिन केवल मेहनत से परिणाम मिलते हैं ये कहना थोड़ा मुश्किल है ।  ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जिनका अवलोकन करने से हमें पता चलेगा कि व्यक्ति की सफलता में उसकी मेहनत के अलावा भी कुछ है …. जो उस व्यक्ति को उस ऊंचाई तक ले जाती है जहां वह आज है । 

भाग्यशाली संयोग और सफलता

ऐसा देखा गया है कि जो सफल लोग हैं वो प्रायः कोई असाधारण योग्यता  के स्वामी नहीं हैं । खासकर विश्व के जितने भी धनवान लोग हैं उनमें से अधिकांश औसत दर्जे के लोग हैं , लेकिन उनके साथ उनके जीवन में घटित होने वाले भाग्यशाली संयोग  (lucky events ) की संख्या दूसरों की तुलना में कहीं अधिक है । उनकी जिंदगी में कई सारे भाग्यशाली संयोग होते हैं ।

वहीं दूसरी ओर पर्याप्त रूप से योग्य और सक्षम लोग भी अपनी जिंदगी में औसत उपलब्धियों से आगे नहीं बढ़ पाते और विभिन्न विशेषज्ञों ने ऐसी बहुत सी घटनाओं का विश्लेषण करने पर पाया है कि औसत उपलब्धियों तक सीमित रहने वाले इन विशेष प्रतिभाशाली लोगों के जीवन में होने वाले भाग्यशाली संयोगों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से कम हैं । और तो और कई बार ये संयोग उसी तीव्रता से विपरीत दिशा में काम करता है ।

मेहनत सफलता और भाग्य

जीवन के किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलताओं में भाग्य की अपनी एक भूमिका है । जेम्स क्लेयर अपनी एक किताब में इस बात का जिक्र करते हैं कि एक ही योग्यता स्तर और एक सी पृष्ठभूमि वाले लोग जब आपस में प्रतिस्पर्धा में हों तो मेहनत से परिणाम तो आता है । लेकिन अप्रत्याशित और बड़ी सफलताओं की बात थोड़ी अलग है –

आज दुनिया जिनको अत्यंत सफल और भाग्यशाली मानती है ऐसे लोग भी अपनी सफलता और अपने निर्णयों के सकारात्मक परिणामों के लिए किस्मत को एक कारक जरूर मानते हैं । 

दुनिया के कुछ सबसे अमीर लोगों में से एक वारेन बफेट जिन पर विभिन्न भाषाओं में लगभग 2000 से अधिक किताबें लिखी जा चुकी हैं या कम से कम इतनी सारी किताबों में उनके बारे में चर्चा है । वो भी अपनी सफलता में भाग्य की स्पष्ट भूमिका को स्वीकार करते हैं । 

जब हम ऐसे लोगो की तुलना करते हैं जिनको समान रूप से किस्मत का साथ मिला है ,तो वहां व्यक्ति के विकल्प  चयन और उसकी आदतों का थोड़ा असर उनकी उपलब्धियों पर पड़ता है । लेकिन जिन उपलब्धियों और सफलताओं की प्राप्ति में व्यक्तियों ने जमीन से आसमान (फर्श से अर्श ) तक का सफर तय किया है ।

वहां हमारे विकल्प चयन, हमारी आदतें और दिशा ये सब बौने पड़ने लगते हैं । ऐसा लगता है – किसी ने सैकड़ों की भीड़ में से एक प्यादे को उठाया और उसे वजीर बना दिया । शायद यही समय की ताकत है और एक मानव की सीमा !

भाग्य पर दुनिया में सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहांनियों की कोई कमी नहीं है । यहाँ मैं दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक बिल गेट्स के एक इंटरव्यू जिसे मैंने पिछले दिनों सुना था की चर्चा करना चाहता हूँ ।  जिसमें उन्होंने कुछ रोचक ढंग से अपनी सफलता का श्रेय बहुत हद तक अपने भाग्य को दिया है ।

बिल गेट्स की कहानी  

बिल गेट्स ने अपने हाई स्कूल को क्रेडिट देते हुए कहा था – “ if there had been no Lakeside, there would have been no Microsoft, कि यदि यह लेकसाइड(Lakeside)  स्कूल नहीं होता तो शायद माइक्रोसॉफ़्ट भी नहीं होता । 

अब देखिए वर्ष 1968 में कंप्यूटर जहां बड़े-बड़े संस्थानों के पास भी नहीं थे वही न्यूयॉर्क सिटी के उस स्कूल में एक द्वितीय विश्व युद्ध के नेवी पायलट बिल डौगल (bill dougall)  के प्रयासों की वजह से एक कंप्यूटर लगाया गया था ।

इस तरह  सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में इस लेकसाइड  स्कूल के एक विद्यार्थी के रूप में उन्हें कंप्यूटर देखने और उसके बारे में जानने का वह मौका मिल गया ।  

पूरी  दुनिया में  वर्ष 1968 में हाई स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या लगभग 300 मिलियन से अधिक थी । जिनमें से 18 मिलियन के आसपास अमेरिका में पढ़ते थे ,उसमें से भी 2,70,000 वाशिंगटन स्टेट में रहते थे ।

थोड़ा और आगे बढ़ें तो सियाटेल में लगभग 100,000 छात्र थे और सियाटेल में रहने वाले कुल 1 लाख छात्रों में से उस लकेसायड स्कूल में पढ़ने वाले  विद्यार्थियों की कुल संख्या लगभग 300 थी । 

अब यदि आप संभावनाओं में विश्वास करते हैं तो जरा निकालिए उस स्कूल में दाखिल होने की संभावना (probability ) ।  

लेक साइड जैसे स्कूलों में पढ़ना जिनके पास ऐसी सोच इतना सामर्थ्य एवं  धन था कि वर्ष 1968 में अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के लिए कंप्यूटर की व्यवस्था कर सके , की संख्या लगभग नगण्य ही थी  । 

इस तरह 300 मिलियन बच्चों के विशाल संख्या  में केवल 300 बच्चों के पास उस समय पढ़ाई के लिए या किसी भी प्रकार के एक कंप्यूटर की सुविधा होना अपने आप में बहुत बड़ा संयोग  था ।

यह दुर्लभ संयोग  एक मिलियन में 1 बच्चे को मिला था या इस संयोग की प्राप्ति के लिए प्रकृति ने 1 मिलियन बच्चों में से एक को चुना था ।  ऐसा हम कह सकते है । 

वही मैं आपका ध्यान एक तथ्य की ओर केंद्रित करना चाहता हूँ – माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक के रूप में बिल गेट्स और पॉल एलन  का नाम दुनिया जानती है  । लेकिन बिल गेट्स ने कुछ जगहों पर अपने तीसरे साथी कैंट इवान्स  के नाम की भी चर्चा की है । बिल गेट्स ने कैंट इवान्स को अपना बहुत ही अच्छा दोस्त और क्लास का सबसे होशियार लड़का भी माना है । 

केंट भी बिल गेट्स और पॉल एलन  की तरह ही कंप्यूटर में काफी रूचि रखते थे और बहुत योग्य थे । लेकिन कैंट इवान्स का नाम कभी भी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक सदस्य के रूप में नहीं आ सका !

क्योंकि दुर्भाग्य से कैंट की मृत्यु एक पर्वतारोहण अभ्यास (माउंटेनियरिंग) के दौरान हो गयी  ग्रेजुएट होने से पहले ही । यदि आप संभावनाओं में विश्वास रखते है, तो उस समय एक हाई स्कूल के लड़के का किसी पर्वतारोहण अभ्यास के दौरान मरना यह भी बहुत कठिन संयोग था ।  ऐसा होने की संभावना भी लगभग  मिलियन में एक है और कैंट इवान्स  एक मिलियन में वह एक लड़का था । 

जैसा हमने ऊपर चर्चा की व्यक्ति के हाथ में केवल और केवल दो चीजें हैं – पहला प्रयत्न और दूसरा प्रतीक्षा ।  बाकी चीजें किसी भी तरह हमारे हाथ में नहीं है ।  बिल गेट्स और  कैंट इवान्स , दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । 

दोनों की जिंदगी में भाग्य और संयोग का बड़ा ही महत्वपूर्ण रोल रहा है । भाग्य की भूमिका निर्णायक रही है ।  अंतर सिर्फ इतना है कि भाग्य ने दोनों के लिए विपरीत दिशा में कार्य किया लेकिन उसी सिद्दत , उसी तीव्रता से ! परिणाम दुनिया के सामने है ।

ऐसे और भी बहुत सारे उदाहरण दिए जा सकते हैं … और तो और आप अपने आसपास भी ऐसे उदाहरणों को ढूंढ सकते हैं , देख सकते है ।  जहां किसी के द्वारा लिया गया गलत निर्णय भी सही साबित हो जाता है और कई बार काफी सोच समझ कर लिया गया सही प्रतीत होता हुआ निर्णय भी काफी घातक सिद्ध होता है। 

तो दोस्त हमारे जीवन में जो भी परिणाम हमें प्राप्त हो रहे हैं, उनमें हमारे निजी प्रयासों के अलावा कुछ बाहरी कारकों का भी प्रभाव निश्चित रूप से रहता है ऐसा मानने में हम में से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए । 

जय और पराजय दोनों एक सच है । इस सत्य को हमें स्वीकार करना चाहिए । पूरे आदर और निष्ठा से पराजय को भी स्वीकार करना चाहिए और जय का स्वागत भी ! परिस्थितियों पर व्यक्ति का नियंत्रण नहीं होता लेकिन घटनाओं पर नियंत्रित प्रतिक्रिया तो हमारे वश में हो सकता है !

ऐसा करके हम अपने जीवन के हरेक कार्य  में जहां एक संतुष्टि और आनंद का अनुभव कर पाएंगे वहीं निराश का भाव कभी हमें छू भी नहीं पाएगा । 

अंतिम विचार

इस लेख को पढ़ने के बाद आपको कहीं से भी तो हतोत्साहित  होने की जरूरत नहीं है । बल्कि पूरी ईमानदारी निष्ठा और सच्चाई से अपने प्रयत्नों में अनवरतता लानी है बिना किसी अपेक्षा के दबाव में डूबे हुए !  

जीवन में कठिन परिश्रम निश्चय ही महत्वपूर्ण है लेकिन कई बार बाहरी कारकों के कारण से हमारी प्राप्ति और उपलब्धियों का ग्राफ  हमारे संघर्ष और मेहनत के अनुकूल नहीं रह पाता ।  हमें उसे भी पूरी निष्ठा और आदर से स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए ।  इसे हमारे आनंदित जीवन जीने का एक सूत्र माना जा सकता है ।

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