Homeसामान्य ज्ञानराष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य और ध्वज संहिता

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य और ध्वज संहिता

मित्र, स्वतंत्रता दिवस आने वाला है ऐसे में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है । यह लेख मुख्य रूप से हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पर ही केंद्रित है । इसमें प्रदान की गयी जानकारियां राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पर निबंध लिखने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में तिरंगे से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने में आपके लिए सहायक होंगी ।

किसी राष्ट्र का ‘राष्ट्रीय ध्वज’ उस राष्ट्र की स्वतंत्रता और संप्रभुता का प्रतीक होता है। प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक राष्ट्रीय ध्वज होता है। किसी भी देश का राष्ट्रीय ध्वज उस देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है । ऐसे में राष्ट्रीय ध्वज का रोल काफी अहम हो जाता है ।

हमारे देश का भी राष्ट्रीय ध्वज है, जिसे हम तिरंगा कहते हैं। तीन रंगों में पिरोए जाने के कारण ही हम अपने राष्ट्रीय ध्वज को ‘तिरंगा’ कहते हैं। प्रत्येक भारतीय के लिए तिरंगा उसके मान-सम्मान प्रतिष्ठा और गर्व का विषय है । यह देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता, मान और गर्व का प्रतीक है। 

आइए आगे जानते हैं तिरंगे से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (जैसे कि- हमारा राष्ट्रीय ध्वज जिसे हम तिरंगा कहते हैं, वह किस कपड़े से बना होता है ? इसको हमारे देश ने कब स्वीकार किया? आम नागरिकों को तिरंगा फहराने का अधिकार कब प्राप्त हुआ? तिरंगे में मौजूद तीनों रंग किस चीज़ का प्रतीक होते हैं? आदि … ) इसके साथ ही तिरंगे से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी आपको पढ़ने मिलेंगी ।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का इतिहास

देश के तिरंगे का इतिहास काफी रोचक है। इसे देश को अंग्रेजों से मिली आजादी से कुछ दिनों पहले यानि 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।

हालांकि जब तिरंगे में चरखे की जगह अशोक चक्र लगाने का प्रस्ताव पास हुआ था, तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बहुत नाराज़ हो गए थे। इस प्रकार, तिरंगे को 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 के बीच देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। 

भारतीय तिरंगे को आंध्रप्रदेश के रहने वाले पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था । भारतीय तिरंगे को तैयार करने के लिए  पिंगली वैंकेया को आज भी पूरा देश सलाम करता है।

आपको बता दें कि 1947 से पहले ध्वज के स्वरूप को पांच बार बदला जा चुका था। आप को यह जानकर संभवतया हैरानी होगी कि वर्तमान स्वरूप वाला तिरंगा हमें छठी बार में प्राप्त हुआ था। सबसे पहले राष्ट्रीय ध्वज को कोलकाता में 7 अगस्त, 1906 को फहराया गया था।

इसका स्वरूप आज के तिरंगे से बिल्कुल ही भिन्न था। तब उसमें सबसे ऊपर हरा रंग था, जिसमें कमल बना था । बीच की पीली पट्टी पर वंदे मातरम् लिखा हुआ था और सबसे आखिरी पट्टी लाल रंग की हुआ करती थी, जिसमें एक तरफ सूरज और दूसरी ओर चांद बना हुआ था।

इसके बाद 1907, 1917, 1921 में भी तिरंगे के डिजाइन में काफी बदलाव किए गए । इन सभी के बाद वर्तमान तिरंगे को संविधान सभा में सर्वसहमति से 1947 में अपनाया गया था। 

तिरंगे में मौजूद रंगों का अर्थ व उनका महत्व

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा केसरिया, सफेद तथा हरा समेत तीन रंगों से सुशोभित है। इन तीनों रंगों के अपने-अपने प्रतीक और महत्व हैं । ये अलग अलग चीजों के परिचायक हैं ।

केसरिया- तिरंगे में सबसे ऊपर की पट्टी का रंग केसरिया होता है। केसरिया यानि भगवा रंग वैराग्य का परिचायक है । केसरिया रंग बलिदान तथा त्याग का प्रतीक होता है। 

सफेद- यह रंग शान्ति का प्रतीक होता है और तिरंगे में बीच की पट्टी पर उपलब्ध होता है। इस पट्टी में नीले रंग का 24 तीलियों वाला अशोक चक्र भी मौजूद होता है।

हरा- यह रंग तिरंगे की सबसे आखिरी पट्टी में मौजूद है और यह खुशहाली और प्रगति का प्रतीक होता है। हरा रंग देश की हरियाली को भी बखूबी दर्शाता है। हरा रंग बीमारियों को दूर रखने के साथ-साथ आंखों को सुकून भी देता है। 

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का आकार

अब जानते हैं कैसा होता है तिरंगे का आकार और उसमें प्रयुक्त होने वाले कपड़े के बारे में ??

तिरंगे की हर एक पट्टी क्षैतिज आकार की होती हैं। बीच में मौजूद सफेद रंग की पट्टी पर गहरे नीले रंग का अशोक चक्र होता है जिसमें 24 तीलियां होती हैं । झंडे की लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है।

तिरंगे को केवल खादी या सूती कपड़े से ही बनाया जाता है। प्लास्टिक का तिरंगा बनाना गैरकानूनी माना जाता है, जिसके लिए निर्माता को काफी अधिक जुर्माना देना पड़ सकता है। 

तिरंगे कहां बनते हैं

भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज बनाने का अधिकार कर्नाटक खादी ग्रामोद्वोग संयुक्‍त संघ (फेडरेशन) को ही है । यह खादी व विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड देश की अकेली राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के लिए एक मात्र अधिकृत BIS सर्टिफिकेशन प्राप्त यूनिट है ।

तिरंगे के निर्माण कई प्रक्रियाओं से गुजरता है। इसमें कताई, बुनाई, ब्लीच करना और रंगना, अशोक चक्र बनाना, सिलना और बांधने की प्रक्रिया शामिल हैं। 

तिरंगे के अपमान पर सजा का प्रावधान

हमारे संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्यों में भी राष्ट्रध्वज के आदर की बात कही गई है। इसके विपरीत आचरण करने वाले व्यक्ति जो तिरंगे का अपमान करता हुआ पाया जाता है, उसपर कानूनी कार्रवाई की जाती है। इसके लिए संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं ।

राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत 3 साल की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। इस अधिनियम के अनुसार मौखिक या लिखित शब्दों अथवा कृत्यों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर सजा का प्रावधान है ।

ध्वज संहिता के बारे में

ध्वज संहिता निर्देशित करती है कि आप राष्ट्रीय ध्वज के साथ किस तरह से पेश आ सकते हैं। 2002 में ध्वज संहिता में संशोधन किया गया था ।

ध्वज संहिता 2002 जिसे 26 जनवरी 2002 में लागू किया गया,के लागू होने के बाद भारत के जन-सामान्य और आम नागरिकों को भी अपने घरों और दफ्तरों में तिरंगा ध्वज फहराने की अनुमति मिल गयी । बशर्ते वह तिरंगा के सम्मान का ख्याल रखता हो ।

पहले कोई संवैधानिक पद पर कार्यरत व्यक्ति ही ध्वज को फहरा सकता था। भारत में ध्वज संहिता ( Flag Code of India-फ्लैग कोड ऑफ इंडिया) नामक एक कानून बना हुआ है । इस कानून में विभिन्न संगठन,एजेंसियों और आम नागरिकों द्वारा ध्वज प्रदर्शन के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और नियमों का उल्लेख है ।

इस कोड में वर्णित कानूनों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के लिए दंड का भी प्रावधान किया गया है । अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो जैसा कि हमने पहले बताया -उसे जेल भी हो सकती है ! 

हमारा ध्वज हमारे आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है इसलिए हमें सदैव ऐसा ही आचरण करना चाहिए जिससे ध्वज की शान, प्रतिष्ठा, मान तथा गौरव सदा बनी रहे। मित्र हम सभी को कानून के अनुसार ध्वज को सदैव सम्मान की नजर से देखना और ध्वज के प्रति सम्मान प्रदर्शित करना चाहिए तथा तिरंगे को कभी भी झुकने नहीं देना चाहिए। 

राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के नियम

आगे हमने हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने से संबंधित कुछ सामान्य नियमों का उल्लेख किया है । विस्तृत जानकारी के लिए आप भारत की ध्वज संहिता, 2002 तथा राष्ट्रीय सम्मान के प्रति अपमान रोकथाम विधेयक-1971 का अध्ययन कर सकते हैं ।

  • तिरंगे को राष्ट्रीय पर्वों के दौरान शैक्षणिक संस्थाओं में विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भवना विकसित करने तथा ध्वज के प्रति सम्मान दर्शाने हेतु फहराया जा सकता है।
  • देश के सभी नागरिक अपने घरों और परिसरों में राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान के साथ फहरा सकते हैं।
  • तिरंगे झंडे को वस्त्रों, पर्दों, कपड़ों के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। 
  • तिरंगे को सूर्योदय से लेकर सिर्फ सूर्यास्त तक (कुछ अपवादों के साथ) फहराया जा सकता हैं। साथ ही राष्ट्रीय ध्वज को जमीन पर नहीं रख सकते हैं। 
  • जहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा रहा हो वहां अन्य किसी भी ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचे स्थान पर नहीं लगाया जा सकता है ।
  • राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का उपयोग अन्य कार्यों जैसे कि वंदनवार , ध्वज पट्ट या अन्य किसी संरचना के रूप में नहीं किया जा सकता ।
  • 2002 से पूर्व इसे देश की आम जनता सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों के दिन ही फहरा सकती थी। लेकिन अब अन्य दिनों में भी इसके सम्मान का उचित ख्याल रख कर फहराया जा सकता है ।
  • वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज को लगाने की अनुमति कुछ प्रतिष्ठित व उच्च पदों पर विराजमान लोगों को ही दी गई है। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रीमंडल के सदस्य, सांसद, विधायक, न्यायधीश तथा जल-थल-वायु सेना के अधिकारी शामिल हैं, जो अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाकर चल सकते हैं।
  • राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की मृत्यु एवं राष्ट्रीय शोक की स्थिति पर झंडा आधा झुका होता है।

निष्कर्ष:

राष्ट्रीय ध्वज देश की अस्मिता और पहचान से जुड़ा हुआ है । राष्ट्रीय ध्वज देश को एक अलग पहचान देता है। राष्ट्रीय ध्वज देश के मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व गौरव की बात होती है। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिए व कोशिश करनी चाहिए यह कभी भी नहीं झुके।

जिस ध्वज के सम्मान में महान सपूतों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए उस पवित्र ध्वज के सम्मान की रक्षा हमारा नैतिक कर्तव्य होना चाहिए ।

मित्र हम सभी नागरिकों को भी अपनी अंतिम सांस तक अपने देश और अपने राष्ट्रीय ध्वज का मान बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए एवं अपने कार्यों से अपने राष्ट्र के गौरव को और बढ़ाना चाहिए । विदेशों में अपने अध्ययन , आविष्कारों, शोधों, खेल-कूद आदि मौकों पर अपने देश का गौरव ध्वज तिरंगा गर्व से फहराना चाहिए ।

ईति


हमें पूरा विश्वास है कि हमारे द्वारा स्वतंत्रता दिवस से पूर्व प्रस्तुत यह तथ्यपूर्ण लेख -भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आपको पसंद आया होगा तथा इसे आप राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पर निबंध आदि लिखने में उपयोग कर सकते हैं। त्रुटि अथवा किसी भी अन्य प्रकार की टिप्पणी नीचे कमेंट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं …लिख कर जरूर भेजें ! इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

बने रहिये Vichar Kranti.Com के साथ । अपना बहुमूल्य समय देकर लेख पढ़ने के लिए आभार ! आने वाला समय आपके जीवन में शुभ हो ! फिर मुलाकात होगी किसी नए आर्टिकल में ..

निवेदन : – हमें अपनी टीम में ऐसे लोगों की जरूरत है जो हिन्दी में अच्छा लिख सकते हों । यदि आप हमारी टीम में एक कंटेन्ट राइटर के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो आगे दिए गए ईमेल पते पर मेल कीजिए । प्रत्येक लेख और आपकी लेखन क्षमता के हिसाब से उचित राशि प्रदान की जाएगी । हमसे जुड़ने के लिए संपर्क कीजिये Email :contact@vicharkranti.com

निवेदन : – हमें अपनी टीम में ऐसे लोगों की जरूरत है जो हिन्दी में अच्छा लिख सकते हों । यदि आप हमारी टीम में एक कंटेन्ट राइटर के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो आगे दिए गए ईमेल पते पर मेल कीजिए । प्रत्येक लेख और आपकी लेखन क्षमता के हिसाब से उचित राशि प्रदान की जाएगी । हमसे जुड़ने के लिए संपर्क कीजिये Email :contact@vicharkranti.com

Reference( संदर्भ) :-

विचारक्रान्ति के लिए – आंशिका जौहरी

Advertisements
Vichar Kranti
विचारक्रांति टीम (Vichar-Kranti.Com) - चंद उत्साही लोगों की टीम जो आप तक पहुंचाना चाहते हैं सही और जीवनोपयोगी सूचनाओं के साथ जीवन बदलने वाले सकारात्मक विचारपुंजों को । उदेश्य सिर्फ एक कि - सब आगे बढ़े और सबके साथ हम भी ! आप भी अगर कुछ अच्छा लिखते हैं, तो जुड़ जाईये न हमारे साथ ... मिलकर कुछ अच्छा करते हैं ...! संपर्क सूत्र : contact@vicharkranti.com जय विचारक्रांति !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

कुछ नए पोस्ट्स

amazon affiliate link

पढिए अच्छी किताबों में
सफलता के सीक्रेट

error: Content is protected !!