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RTI Act Hindi | सूचना का अधिकार-जानिए आवेदन से लेकर चुनौती तक हिन्दी में

सूचना का अधिकार(rti act hindi) से संबंधित इस लेख में हमारा उदेश्य है कि आपको सूचना का अधिकार से संबंधित सभी तथ्यों यथा-विभिन्न प्रावधानों , इसके महत्व व्हिसल ब्लोअर के संरक्षण तथा प्रतिबंध तथा आरटीआई आवेदन करने की प्रक्रिया से अवगत करवाया जाए । इसे हमने छात्रों और आम जिज्ञासुओं को ध्यान में रख कर लिखा है । इसलिए सबसे पहले बात आवेदन करने की फिर पढिए तथ्यपरक जानकारियां …

आरटीआई के तहत आवेदन

सूचना अधिकार के लिए आवेदन online तथा offline दोनों ही मोड में किया जा सकता है ।

  • इस कानून के अंतर्गत भारत के नागरिक द्वारा किसी भी सरकारी विभाग की जानकारी प्राप्त करने के लिए लिखित या टाइप करके आवेदन उस विभाग के जन सूचना अधिकारी को दिया जा सकता है। आवेदक द्वारा सूचना प्राप्त करने के लिए हिंदी या अंग्रेजी या शासकीय भाषा में अनुरोध किया जाता है।
  • ऑनलाइन सूचना प्राप्त करने के लिए आप मोबाईल एप या वेबसाईट पर जाकर आरटीआई फाइल कर सकते हैं ।
  • प्रवासी भारतीय आवेदन इ-पोस्टल ऑर्डर के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं ।
  • आवेदन के साथ ही आपको 10 रुपये का शुल्क देना होगा जिसे आप अनलाइन मोड में विभिन्न डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अदा कर सकते हैं । offline mode में 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर या कोर्ट स्टाम्प के द्वारा भी भुगतान किया जा सकता है ।

वर्तमान में ऑनलाइन जानकारियां प्राप्त करना अधिक आसान हो गया है तो आप किसी भी केंद्र सरकार के विभाग से सूचना प्राप्त करने के लिए इस वेबसाईट (www.rtionline.gov.in) का सहारा ले सकते हैं ।

राज्य सरकार से संबंधित जानकारियां संबंधित राज्यों के सूचना आयोग के कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं । अधिक जानकारी के लिए नीचे विडिओ लिंक भी दिया गया है ।

video credit:rishabh jain

अगर आप सिर्फ यह जानने आए थे कि आरटीआई आवेदन कैसे करते हैं तो अब आपका कार्य समाप्त हुआ आप किसी अन्य पोस्ट को पढ़ सकते हैं लेकिन यदि आप इससे अधिक जानना चाहते हैं तो आगे पढिए RTI Act Hindi …

आरटीआई की शुरुआत

आरटीआई का मुख्य उद्देश्य सरकार के कार्य में पारदर्शिता लाना, जनता को समस्त सूचनाओं से अवगत कराना, अनुचित कार्यों पर अंकुश लगाना, सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट करना, नागरिकों को सशक्त बनाना साथ ही भ्रष्टाचार को नियंत्रण में लाना तथा देश और प्रदेश के लोकतंत्र को और सुदृढ़ बनाना है।पारदर्शिता और उतरदायित्वपूर्ण शासन प्रशासन की स्थापना और संचालन ही आरटीआई कानून की स्थापना का उदेश्य है ।

स्वीडन को सूचना के अधिकार के कानून की जननी कहा जाता है। विश्व में सर्वप्रथम स्वीडन में ही वर्ष 1766 में सूचना का अधिकार कानून लागू किया गया था। इसके पश्चात यह कानून को प्रशासकीय पारदर्शिता के लिए अन्य देशों के द्वारा भी अपनाया जाने लगा।

आरटीआई क्या हैRTI Act Hindi

वर्तमान का सूचना अधिकार कानून भारतीय संसद द्वारा स्वीकृत एक अधिनियम है जिसके माध्यम से विभिन्न सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध सूचनाओं तक आम आदमी की पँहुच को सुनिश्चित किया गया है ।

आरटीआई (RTI) का अर्थ – आरटीआई (RTI) का पूरा नाम राइट टू इंफॉर्मेशन (Right to information) यानि सूचना का अधिकार होता है। जिसका तात्पर्य जनसामान्य के द्वारा सूचना प्राप्त करने के अधिकार से है।

इस कानून के अंर्तगत भारत के प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार प्राप्त  है कि वह देश के समस्त कार्य व शासन प्रणाली की जानकारी प्राप्त कर सकता है। जिसके लिए उसे आरटीआई फाइल करना आवश्यक होता है। 

भारत में आरटीआई कब लागू हुआ था

आरटीआई भारतीय संसद का एक अधिनियम है। इस अधिनियम को freedom of Information Bill- 2002 को बदलने के लिए भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। इसे(Right to Information) वर्ष 2005 में अधिनियमित किया गया है । भारत सरकार ने सूचना का अधिकार संसोधन विधेयक 2019 के द्वारा इस कानून में कुछ परिवर्तन किया है ।

2005 से 2019 तक

RTI Act Hindi में आगे पढिए पढिए आरटीआई लागू होने से पहले आने वाले अहम पड़ावों को – सर्वप्रथम लोकसभा द्वारा कुछ संशोधनों सहित पारित किया गया। इसके पश्चात् 12 मई 2005 को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया‌। अंत में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 15 जून 2005 को अनुमोदन प्राप्त हुआ जिसके फलस्वरूप 12 अक्टूबर 2005 को यह अधिनियम संपूर्ण धाराओं के साथ प्रभावी रूप से जम्मू कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत देश में लागू हो गया।

सूचना का अधिकार कानून को राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने से पहले 9 राज्यों ने अपने राज्यों में इस कानून को लागू कर रखा था। जिसमें यह कानून तमिलनाडु तथा गोवा ने 1997, कर्नाटक ने 2000 दिल्ली में 2001 में लागू हुआ था।

प्रारंभ में आरटीआई अधिनियम जम्मू कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू हुआ था परंतु 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू तथा कश्मीर व लद्दाख में विभाजित किया गया है। इस फैसले के परिणाम स्वरूप जम्मू कश्मीर का आरटीआई एक्ट, 2019 समाप्त हो चुका है। अतः अब यहां पर भी केंद्र का आरटीआई एक्ट, 2005 लागू हो गया है।

इसके अतिरिक्त लोकसभा के द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को संशोधित करने का प्रस्ताव देते हुए सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक, 2019 भी पारित किया जा चुका है।

आईटीआई एक्ट-2005 के प्रावधान

सूचना का अधिकार अधिनियम अर्थात आरटीआई एक्ट 2005 में कुल 31 धाराएं एवं 5 अध्याय वर्णित हैं। आरटीआई एक्ट 2005 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान निम्नलिखित हैं –

  • समस्त सरकारी कार्यालय, सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर यूनिट, किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता से चल रही गैर सरकारी संस्थाएं व शिक्षण संस्थान आदि से उनके कार्यों, दस्तावेजों, रिकार्डो की प्रस्तावना इत्यादि की प्रिंटआउट, प्रतिलिपि, फ्लॉपी डिस्क, वीडियो कैसेट के रूप में या अन्य किसी इलेक्ट्रॉनिक साधन से सूचना मांगी जा सकती है।
  • आरटीआई एक्ट, 2005 के अंतर्गत जनता द्वारा सरकारी सूचनाएं प्राप्त करने के लिए आवेदन करना आवश्यक है। आवेदन पत्र के साथ आवेदन शुल्क भी देना होता है। सरकार द्वारा आवेदन हेतु ₹10 का शुल्क निर्धारित किया गया है। कुछ राज्यों में यह आवेदन शुल्क अधिक भी वसूला जाता है । बीपीएल कार्ड धारकों को इस आवेदन शुल्क में छूट प्राप्त होती है।
  • समस्त सरकारी विभागों में एक या एक से अधिक जन सूचना अधिकारी बनाए गए हैं । इनके लिए अलग से जन सूचना केंद्र अथवा कार्यालय भी बनाया जाता है। जहां ये अधिकारी आरटीआई एक्ट के तहत सूचना के अधिकार के आवेदन स्वीकार करते हैं। आवेदनकर्ता द्वारा मांगी गई सूचनाओं को एकत्र करते हैं, तथा आवेदनकर्ता को उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत धारा 12 में केंद्रीय सूचना आयोग के गठन तथा धारा 13 में सूचना आयुक्तों की पद अवधि एवं सेवा शर्तें तथा धारा 14 में सूचना आयुक्तों को पद से हटाने के प्रावधान उल्लिखित हैं । 
  • इस एक्ट के अंतर्गत जनसूचना अधिकारी का दायित्व है कि वह 30 दिन के अंदर मांगी गई सूचना को उपलब्ध कराएं।
  • जीवन व स्वतंत्रता से संबंधित मामले में 48 घंटों में सूचना उपलब्ध करानी पड़ती है। कुछ विशेष मामलों में 45 दिन के अंदर भी सूचना प्रदान की जाती है।
  • आरटीआई एक्ट 2005 के अंतर्गत जनसूचना अधिकारी को आवेदनकर्ता द्वारा मांगी जाने वाली सूचना के विषय में जानकारी प्राप्त करने का प्रयोजन अथवा कारण पूछने का अधिकार प्राप्त नहीं है। उन्हें सूचना किस हेतु से मांगी जा रही है ये स्पष्टीकरण प्राप्त करने के अधिकार नहीं है । 
  • इस एक्ट(rti act hindi) के अंतर्गत यदि लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्त करने से  इंकार कर दिया जाता है, सूचना मांगने का कारण पूछा जाता है या निर्धारित आवेदन शुल्क से अधिक शुल्क मांगा जाता है तो इसकी शिकायत केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग से की जा सकती है।
  • आरटीआई एक्ट 2005 के तहत जिन सूचनाओं की जानकारी जन सूचना अधिकारी द्वारा नहीं दी जा सकती, उन विषयों का वर्णन धारा 8 में किया गया है। परंतु मांगी गई सूचना यदि जनहित में है तो धारा 8 के अंतर्गत ना होने पर भी सूचना दी जा सकती है।
  • इस एक्ट के अंतर्गत यदि आप मांगी गई सूचना की प्रथम अपील से असंतुष्ट हो तो धारा 19(3) के आधार पर, 90 दिन के अंदर केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग के पास दूसरी बार अपील कर सकते है। द्वितीय अपील के पश्चात असंतुष्ट होने पर  कोर्ट की सहायता ली जाती है।
  • दस्तावेजों की प्रति के लिए भी शुल्क देना पड़ता है। यह शुल्क प्रति दस्तावेज के आकार आदि के अनुसार लिया जाता है। अलग अलग राज्यों में ये शुल्क अलग अलग लिया जाता है ।
  • इसके अतिरिक्त यदि सूचना तय समय सीमा में उपलब्ध नहीं किया जाए तो ऐसी स्थिति में सूचना बिल्कुल निःशुल्क प्रदान करने का प्रावधान धारा 7(6) में की गयी है ।

आरटीआई एक्ट का महत्व

एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सरकार का संचालन जनता द्वारा चयनित प्रतिनिधि जनता से टैक्स के रूप में वसूल किए गए पैसों से ही करते हैं । ऐसी स्थिति में इन पैसों का उपयोग सरकार किस प्रकार से कर रही है इसकी जानकारी जनता को रहने से सरकार एवं प्रशासन के विभिन्न विभाग अधिक पारदर्शी और सक्षम तरीके से अपना कार्य निष्पादित करेंगे ।

भागीदारी पारदर्शिता और उतरदायित्व उत्कृष्ट शासन के लिए आवश्यक तत्व है । सरकारी अभिलेखों तक आम आदमी की पहुंच और इन अभिलेखों का सार्वजनिक संवीक्षा के लिए उपलब्धता उपरोक्त तीनों तत्वों की प्रतिपूर्ति के लिए एक सुदृढ़ रूपरेखा तैयार करता है ।

आगे हमने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं में इसी आरटीआई के महत्व (Importance of RTI Act in Hindi) को रेखांकित करने की कोशिश की है –


  • आरटीआई एक्ट के तहत एक शिक्षित नागरिक सरकार के कार्यों में पारदर्शिता लाता है। जो सरकारी विभाग अथवा सेवक कार्यों के प्रति लापरवाही करते हैं उनकी छवि समाज के सामने प्रस्तुत हो जाती है। ये एक प्रकार से कुशल कार्य निष्पादन के लिए आवश्यक भी है । 
  • आरटीआई एक्ट द्वारा लिए गए टैक्स और सरकार द्वारा टैक्स के उपयोग संबंधित जानकारी प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रकार से यह सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में बहुत अहम है ।
  • आरटीआई एक्ट के लागू हो जाने पर देश में भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियों में सतर्कता आ जाती है। उनके द्वारा किए जाने वाले भ्रष्ट कार्यों पर रोक लगती है। भ्रष्टाचारी एवं कर्तव्यच्युत कर्मचारियों का खुलासा आसानी से किया जा सकता है।
  • देश का सामान्य से सामान्य नागरिक भी अपने नागरिक अधिकारों की पूर्ति के लिए आरटीआई के माध्यम से जानकारियां मांग सकते हैं । इससे कमजोर और निर्धन वर्ग तक सरकार के समुचित सहायता पहुचने में आसानी हो जाती है । उन्हें अधिक प्रभावी तरीके से अधिकार प्राप्त होते हैं ।

2019 के संसोधन

महत्वपूर्ण संसोधनो में मुख्य सूचना आयुक्त सहित अन्य सूचना आयुक्तों के वेतन ,भत्ते ,पदावधि और सेवा शर्तों में परिवर्तन किया गया है । इस संसोधन में राज्य और केंद्र सूचना आयोग जो कि एक कानूनी निकाय है के सूचना आयुक्तों के लिए वेतन भत्ते सहित अन्य सेवा शर्तों के निर्माण का अधिकार केंद्र सरकार को दे दिया गया है ।

वेतन और भत्तों को केंद्र में क्रमशः मुख्य सूचना आयुक्त सहित अन्य सूचना आयुक्त के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्त के समान तथा राज्यों में निर्वाचन आयुक्त एवं मुख्य सचिव के समान निर्धारित किया गया है ।

आरटीआई एक्ट की चुनौतियां

  • सूचना आयोग के संचालन हेतु व्यापक अवसंरचना और कर्मियों की कमी ।
  • 1923 में बनाया गया सरकारी गोपनीयता कानून (Official Secret Act)
  • भ्रष्टाचार उजागर करने वाले लोगों का उत्पीड़न और प्रताड़ना ।
  • अभिलेखों के डिजिटल संस्करण की उपलब्धता की कमी ।

सूचना का अधिकार एवं प्रमुख तथ्य

  1. कार्मिक प्रशिक्षण विभाग यानि डी ओ पी टी केन्द्रीय सूचना आयोग का नोडल कार्यालय है ।
  2. राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र (NIC) राज्यों में अनलाइन पोर्टल बनाने में राज्यों की मदद करता है उन्हें तकनीकी सहयोग प्रदान करता है ।
  3. केंद्र सरकार के लगभग 2200 से अधिक कार्यालयों एवं उपक्रमों में आरटीआई अधिनियम लागू हैं ।
  4. अनलाइन आवेदन के लिए वेबसाईट और मोबाईल एप भी उपलब्ध है ।
  5. ऐसे मामले जिनसे राष्ट्र की संप्रभुता ,सामरिक हित और राष्ट्रीय एकता को प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो ऐसे मामलों में सूचना का अधिकार का कानून लागू नहीं होता है ।

व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम

हालांकि व्हिसल ब्लोअर के लिए पर्याप्त सुरक्षा तो नहीं है लेकिन व्हिसल ब्लोअर के प्रताड़ना और उत्पीड़न को ध्यान में रख कर सरकर ने उनकी सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं और कुछ कानूनों का निर्माण किया है । आगे प्रस्तुत है व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम-2014 से संबंधित कुछ तथ्य –

  1. इसमें व्हिसल ब्लोअर की परिभाषा दी गई है ।
  2. भ्रष्टाचार उजागर करने वाले लोगों की पहचान गुप्त रखने का प्रावधान किया गया है ।
  3. सक्षम प्राधिकारी को सिविल कोर्ट की शक्तियां प्रदान की गई हैं ।
  4. व्हिसल ब्लोअर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष भ्रष्टाचार को सार्वजनिक कर सकता है ।
  5. इसमें ऑफिसियल सीक्रेट ऐक्ट लागू होता है । यानि सरकारी नियमों के मुताबिक गोपनीय सूचनाओं के खुलासे की अनुमति प्रतिबंधित है ।

हमें पूरा विश्वास है कि हमारा यह लेख सूचना का अधिकार (rti act hindi) पर यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा । त्रुटि अथवा किसी भी अन्य प्रकार की टिप्पणियां नीचे कमेंट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं …लिख कर जरूर भेजें ! इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

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