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जल संरक्षण के आयाम और उपाय-Water saving in Hindi

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इस लेख(Water saving in Hindi) में हमने जल और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बात की है । हमने जलसंरक्षण क्या है तथा क्यों आवश्यक है जल संरक्षण ? जल संरक्षण हेतु व्यक्तिगत स्तर पर अपनाए जाने वाले विभिन्न उपायों सहित दुनिया में जल की उपलब्धता,कुल जलराशि में से पीने योग्य जल की मात्रा ,जैसे विषयों पर भी बात की है । यह पोस्ट आपकी जल संरक्षण से संबंधित कुछ जिज्ञासाओं का उत्तर देने के साथ ही जल संरक्षण पर निबंध -(Hindi essay on save water) आदि के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा ।

जल जीवन के लिए सबसे आवश्यक तत्वों में से एक है,जल को जीवन का पर्याय बताया गया है। कहा जाता है जल है तो कल है और जल ही जीवन है । लेकिन जिस जल के बारे में ये कसीदे हम पढ़ते हैं क्या जीवन के लिए आवश्यक इस जल के संरक्षण और महत्व (the importance of water conservation) को हम सच में  स्वीकार भी करते हैं। 

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हम सभी का ईमानदार उत्तर क्या होगा यह कहने की जरूरत नहीं है ! 

हमारे पूर्वजों ने इसलिए जलाशयों और जलस्त्रोतों को धर्म से जोड़ दिया ताकि हम धर्म के नाम से ही सही, लेकिन जल और जलस्त्रोतों के उपयोगिता और मानव जीवन में उसके महत्व को समझे। इनकी साफ सफाई और रख-रखाव की उचित व्यवस्था करें,जिससे अंततोगत्वा हमें ही लाभ मिले । 

पहले लोग अपने साथ-साथ या कहें तो अपने से अधिक समाज की चिंता करते थे ,और व्यक्ति से बढ़कर समाज, समाज से बढ़कर देश ये बातें सच में चरितार्थ होती थी । 

किसी ने अगर अपने जीवन में बहुत कुछ प्राप्त कर लिया और कुछ धर्म-कर्म का कार्य करना चाहता तो फिर वह  तालाब , बावड़ी, कुएं और अन्य जलस्रोत  का निर्माण करवाता था। 

सामाजिक जीवन में लोग तालाब , बाबड़ी और कुएं  सहित अन्य जलस्रोत के निर्माण को धार्मिक कृत्य समझते थे । यह परोक्ष रूप से उनके द्वारा जल के महत्व का स्वीकरण ही था । लेकिन बदलते दौर में व्यक्ति केन्द्रित समाज की अवधारणा बढ़ी है। लोग अब समाज से अधिक स्वयं की चिंता करने लगे हैं। 

व्यक्ति स्वयं की अधिक चिंता करे यह ठीक भी है, लेकिन यदि हमने हर चीज में समाज से पहले स्वयं को तरजीह देने के चलन को एक स्वीकृत प्रक्रिया में बदलने दिया तो वह दिन दूर नहीं जब प्रकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग के कारण मानव जाति के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह  लग जाय ! 

इसलिए यदि जल के बिना जीवन नहीं है, तो इस अमूल्य प्राकृतिक उपहार के संरक्षण और सदुपयोग की चिंता हमें एक समाज और एक व्यक्ति दोनों के रूप में करनी होगी । चलिये जानते हैं जल संरक्षण के विभिन्न आयामों (different dimensions of water saving in hindi) के बारे में..  

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क्या है जल संरक्षण What is Water Saving in Hindi

जल संरक्षण जल को प्रदूषित होने से बचाना और उसके विवेकपूर्ण उपयोग जिसमें जल के उपयोग को यथासंभव कम करना तथा उद्योग,निर्माण  और कृषि जैसे क्षेत्र जहां पुनः चक्रित जल का उपयोग संभव हो, उसके उपयोग को प्राथमिकता और बढ़ावा देने  को ही हम जल संरक्षण कहेंगे । 

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विभिन्न आंकड़ों के मुताबिक वैसे तो धरती का 71% भाग जल से घिरा हुआ है , जलच्छादित है लेकिन इस विशाल जलराशि का 97 प्रतिशत जल खाड़ा है ।अर्थात पीने और उपयोग करने के योग्य नहीं है । सिर्फ 3 प्रतिशत जल ही उपयोग के लायक है जिसमें से भी 2 प्रतिशत हिमनदों में बर्फ के विशाल हिमखंडों के रूप में मौजूद है। 

अतएव धरती पर उपलब्ध जलराशि का महज 1 प्रतिशत ही उपलब्ध है इस विश्व के डेढ अरब की आबादी के उपयोग हेतु । जिसका उपयोग हम अपने दैनिक कार्यों के अलावा कृषि , सिंचाई,पशुपालन और कल-कारखाने सहित अन्य कार्यों में भी करते हैं । 

क्यों जरूरी है जल संरक्षण 

जैसा कि हमने ऊपर जाना, फिलहाल पूरे विश्व की जनसंख्या के लिए सिर्फ 1 प्रतिशत जल ही उपयोग के लिए उपलब्ध है। यदि इसके विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व को नहीं समझा गया तो वह दिन दूर नहीं जब आबादी का एक बड़ा हिस्सा बूंद-बूंद पानी को तरसे । 

प्रति व्यक्ति पेयजल की उपलब्धता घट रही है जबकि मांग बढ़ रहा है । भूमिगत जल के स्तर में बहुत तेजी से गिरावट हो रही है, जिससे खेती सहित सामान्य जीवन-यापन भी मुश्किल हो रहा है। जलस्रोत से उपभोक्ता तक पहुँचते-पहुँचते जल का पाँचवाँ हिस्सा गटर और नालियों में बह जाता है। 

जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है हमारे देश भारत के भी कई हिस्सों में पानी की भारी कमी हो जाती है । महिलाओं को पानी लाने के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है । लातूर जैसे क्षेत्र में पानी की कमी ,पानी की टैंकर ट्रेन के प्रतीक्षा में लोगों की लंबी-लंबी लाईने और पानी के लिए मार-पीट टीवी चैनलों के लिए सुर्ख़ियाँ बना रहता है। 

अभी भी विकासशील देशों में शहरी आबादी के एक बड़े हिस्से को स्वच्छ पीने लायक पानी नसीब नहीं है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार के लिए प्रयास नहीं किया गया तो पूरी दुनिया में वर्ष 2025 तक लगभग 30 करोड़ लोगों को स्वच्छ पीने लायक पानी नसीब नहीं होगा । डिब्बा बंद बोतलों का कारोबार पूरी दुनिया में लगभग 4 से 6 लाख करोड़ का हो गया है। 

भारत जैसे देशों में जलजनित रोगों के कारण बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं । इसके अलावा यदि इस विषय पर ध्यान नहीं दिया गया तो उत्पन्न पारिस्थितिकीय असंतुलन के कारण अकाल सहित अन्य त्रासदियों का आना आरंभ हो जाएगा जो अंततोगत्वा पूरी मानवता के लिए शुभ नहीं होगा । यही सारे कारण हैं जो जल संरक्षण(water conservation) को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं ।

जल संरक्षण के तरीके 

जीवन के लिए अमूल्य इस जल की सुरक्षा हमारे द्वारा इसे प्रदूषित होने से बचाने और विवेकपूर्ण आवश्यकतानुसार उपयोग पर ही पूरी तरह से निर्भर है। हमारे द्वारा उठाया गया यह कदम इस अमूल्य जीवननीधि जल की उपलब्धता को हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुनिश्चित करेगी। 

वो अंग्रेजी में एक कहावत है न – charity begins at home – तो हमारा आप से अनुरोध है कि इस नेक कार्य की शुरुआत भी आप पहले अपने घर से ही करिए । आगे हम कुछ उपायों की चर्चा कर रहे हैं – जिसको अपना कर के हम जल संरक्षण में अपना योगदान(our contribution in water saving) कर सकते हैं । 

व्यक्तिगत जीवन में जल संरक्षण के उपाय : 

Water conservation measures in personal life:
(water saving measures in Hindi)

  1. नहाते समय झरनों का उपयोग नहीं करे अथवा बहुत देर तक सिर्फ मजे के लिए स्नान करना बंद कर दें । 
  2. कपड़ा साफ करने में यथासंभव वॉशिंग मशीन का उपयोग नहीं करें, क्योंकि इसमें सामान्य हाथों  की धुलाई की तुलना में बहुत अधिक पानी खर्च होता है । यदि वॉशिंग मशीन का उपयोग अनिवार्य ही हो, तो भी केवल एक-दो कपड़ों के लिए नहीं, बल्कि वाशिंग मशीन का उपयोग उसकी पूरी क्षमता भर कपड़ों के लिए करें । 
  3. शौचालयों में उच्च गुणवता वाले  Water  efficient धीमा फ्लश लगवाएँ। 
  4. घर में नल और अन्य टंकियों  से पानी के रिसाव और टपकने को यथासंभव रोकें ।
  5. नालियाँ साफ रखें , नहीं तो इसकी सफाई में भी कई बार काफी मात्रा में पानी बर्बाद हो जाता है। 
  6. घर या बाहर का कूड़ा-करकट  किसी भी स्थिति में अपने आसपास के जलस्त्रोत में नहीं फेकें । 
  7. पेड़-पौधों में सिंचाई के लिए पाइप की जगह वॉटर कैन का इस्तेमाल करें । 
  8. पेड़ पौधे की सिंचाई  सायंकाल में करें, जिससे सिंचाई  में प्रयुक्त जल वाष्पित होकर बेकार न हो, बल्कि पौधे उसका समुचित उपयोग करें। 
  9. खेतों में फसलों की सिंचाई में मिट्टी की नालियों की जगह प्लास्टिक पाईपों का उपयोग करें और यदि संभव हो तो इस के बदले फव्वारों वाली ड्रिप तकनीक का इस्तेमाल कर सिंचाई करें। यह अधिक प्रभावी तकनीक है। 
  10. घरों में उपयोग कर रहे पानी की टंकियों  के लिए वॉटर ओवर फ़्लो अलार्म का उपयोग करें । 
  11. वृक्षारोपण करें- चूंकि वृक्ष  प्रकृति के सबसे बड़े मित्र होते हैं । जहां एक तरफ इससे जलसंरक्षण को बल मिलेगा वहीं मृदा-अपरदन भी कम होगा । 
  12. रेनवाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता दें तथा जहां भी संभव हो अपने घरों अपने दोस्तों के घरों में इसकी व्यवस्था जरूर करें।
  13. आप रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए अपने छत पर गिरने वाली वर्षा जल का संचय और फिर उसका उपयोग कर सकते हैं। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के दो प्रसिद्ध तरीके हैं 1) Roof Top Rain Water Conservation और 2) ferro cement tank – इन तकनीक के उपयोग के द्वारा भी आप जहां जल संरक्षण कर सकते हैं वहीं भूजल के स्तर को बढ़ाने में , भू-जल को रीचार्ज करने में भी अपना योगदान कर सकते हैं। 
  14. आरओ वॉटर का दुरुपयोग नहीं करें । शहरों में चूंकि लोग आरओ का ही पानी अधिकतर पीते हैं लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जहां यह स्वास्थ्य के लिए उतना अनुकूल नहीं है, वहीं एक लीटर साफ आरओ वॉटर के लिए कम से कम तीन लीटर पानी का इस्तेमाल होता है । आपको आरओ का पानी पीना है जरूर पिएं लेकिन अपने गिलास या पानी पीने के पात्र में उतना ही जल लें जितना जरूरी हो । 
  15. इसके अलावा आप अपने वॉश बेसिन या अन्य जगहों पर, यदि नल के फ़्लो को कम कर देंगे तो इससे भी पानी के दुरुपयोग में स्वतः ही कमी आएगी। 
  16. बाथरूम में आप एक अतिरिक्त बाल्टी भी रख सकते हैं जिससे खास कर गर्मी के मौसम में पानी का दुरुपयोग कम हो । अक्सर गर्मियों में हम ठंडे  पानी से हाथ-मुंह धोने के लिए उससे पहले बहुत सारा पानी बर्बाद कर देते हैं । जिसे एक अतिरिक्त/एक्सट्रा बाल्टी के उपयोग द्वारा कम किया जा सकता है। 
  17. इसके अलावा हमारी सलाह यही रहेगी कि छोटे-मोटे प्लमबिंग  के काम खुद भी करना सीख लीजिये । इससे निश्चित ही पानी के दुरुपयोग में कमी आएगी , कम से कम आपके घर में…! क्योंकि कई बार हम मिस्त्री (प्लंबर ) को दिये जाने वाले पैसे के कारण छोटी-छोटी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं । 
  18. घर के बाहर जब कभी भी कहीं किसी जल्स्त्रोत की टोंटी  या नल या कोई टंकी टपकती हुई मिले तो तुरंत इसकी सूचना वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट के लोगों को दीजिये । 

जल संरक्षण हेतु अन्य उपाय

व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए कदमों के अलावा कुछ ऐसे भी कदम हैं जिनको एक समाज के रूप में यदि अपनाया जाए तो इससे जल संरक्षण के प्रयासों को और अधिक बल मिलेगा ।

  1. पानी चूंकि उद्योग धंधों के लिए भी बहुत आवश्यक है और भारी मात्रा में पानी की उपलब्धता उद्योगों के लिए जरूरी है लेकिन उद्योगों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर पानी की खपत को कम किया जा सकता है । यह जल संरक्षण (towards water saving in hindi) के दिशा में बहुत ही प्रभावी कदम होगा । 
  2. शहरों में नगरपालिकाएँ और अन्य स्थानीय निकाय के द्वारा हमारे घरों तक पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाता है, ऐसे में हमें ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई सप्लाई वॉटर का दुरुपयोग नहीं करें । यदि कोई ऐसा करता हो तो उसे भी ऐसा करने से रोकने का भी समुचित उपाय किया जा सकता है ।
  3. यदि संभव हो तो भू-जल प्रबंधन एवं वितरण के प्रभावी उपायों और जल संरक्षण हेतु जन-जागरूकता कार्यक्रम सरकारी तथा सामाजिक या व्यक्तिगत स्तर पर भी चलाया जा सकता है जिसमें सामान्य जन  को जल की महत्ता एवं भविष्य की परिस्थितियों के बारे में बताने का प्रयास हो । 

हमने ऊपर कुल 21 उपायों की चर्चा की है जो जल संरक्षण की दिशा में हमारे और प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएंगे ।

मित्र! अंत में आप से इतना ही कहना चाहता हूँ कि जल संकट धरती पर जीवन और मनुष्य के अस्तित्व सहित हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन के लिए बहुत ही गंभीर प्रश्न बन कर खड़ा है ! यदि हमने आज इसके बारे में नहीं सोचा ,आज इस प्रश्न से स्वयं को बचाया , तो हमारी यह अनदेखी धरती पर जीवन के अंधकारमय भविष्य की गारंटी होगी इसमें कोई दोराय नहीं हो सकता। 

जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्येक व्यक्ति का बराबर का अधिकार है । इसलिए किसी को जल के दुरुपयोग की विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती । यह हम सब की सांझी संपत्ति है । इसलिए इसकी रक्षा भी हमें पूरे मनोयोग से करनी है और दुरुपयोग करने वाले को प्यार से रोकना भी है।

अंत में आपके लिए इस दोहे के माध्यम से जल संरक्षण के उपायों को अपनाने और विचार क्रांति परिवार से जुड़ने का आह्वान भी करता हूँ –

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे मोती मानुष चून ॥

* इति *

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