HomeInspiring storyपंचतंत्र की कहानी : हितचिंतकों का कहा मानिए ।

पंचतंत्र की कहानी : हितचिंतकों का कहा मानिए ।

मित्र प्रस्तुत कहानी मूल रूप से पंचतंत्र की कहानियों से अनुदित की गई है । पंचतंत्र में कहानियाँ कोई अलग-अलग हैं नहीं !इसके पांचों खंडों में हर कहानी एक दूसरे से जुड़ती हुई चलती हैं । ये कहानियाँ जीवनोपयोगी गूढ़ ज्ञान से भरी पड़ी हैं । वैसे तो इन कहानियों को सदियों पहले लिखा गया है लेकिन इनकी सांदर्भिकता न तो हमारी पीढ़ी के लिए कम हुई हैं न आगे होंगी । इसलिए हम एक शृंखला के रूप में इन कहानियों को आप तक लाने की शुरुआत कर रहें हैं । इसी कड़ी में प्रस्तुत है पहली कहानी…

हितचिंतकों का कहा मानिए

समुद्र तट पर टिटिहरे का एक जोड़ा निवास करता था। टिटिहरे की पत्नी टिटिहरी जब माँ बनी तो उसने टिटिहरे से अंडा देने के लिए कोई सुरक्षित स्थान खोजने को कहा, ताकि उसके बच्चे सुरक्षित रहें । टिटिहरा थोड़ा अभिमानी था । उसने अपनी पत्नी को जवाब दिया – यह सुरक्षित स्थान है ,तू चिंता न कर बावली ! 

टिटिहरी ने थोड़ी चिंता जताते हुए कहा – ये स्थान ठीक नहीं है , समुद्र में जब ज्वार उठता है तो वह बड़े-बड़े मतवाले हाथी को भी अपने साथ बहा ले जाता है । इसलिए तू कहीं और कोई स्थान देख ले । 

टिटिहरा ने पुनः अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा – समुद्र इतना भी दुस्साहसी नहीं बन गया है कि वो मेरे बच्चों को बहा ले जाय । उसे यहां रहना है या नहीं… बहुत डरता है वह मुझसे । 

समुद्र चुप-चाप से उनकी बातें सुन रहा था | उसने सोचा ये टिटिहरा बड़ा अभिमानी है इसे एक बार सबक सीखा ही दिया जाय । 

समुद्र में एक विशाल ज्वार आया और टिटिहरे के अंडे को अपने साथ बहा ले गया । टिटिहरी जब घर लौटी तो अपने अंडों को समुद्र में बहता हुआ देख कर अत्यंत दुखी हो गयी । रोते बिलखते हुए उसने टिटिहरे को कहा – मूर्ख! मैंने लाख समझाने बुझाने की कोशिश की लेकिन तुमने अपने अभिमान मे डूब कर मेरी एक न सुनी । परिणाम देख ले आज उजाड़ दिया तूने अपना ही घर …….!


सीख इस कहानी की सीख यही है कि हमारे परिजन और हितचिंतक जो राय दें, उस पर हमें जरूर ध्यान देना चाहिए । बुद्धिमान भी वही व्यक्ति है जो भविष्य में आने वाली विपत्तियों से बाहर निकालने के उपायों को पहले से ही सोच ले । क्योंकि हर व्यक्ति हर समय अपने ऊपर आने वाली समस्या का तुरंत निदान नहीं सोच सकता | कुछ लोग सोच सकते हैं । 

जो इस उम्मीद मे जीता है कि जो होगा देखा जाएगा अक्सर समय उसे कुछ देखने लायक छोड़ता नहीं  है । 


कैसी लगी आपको यह कहानी अपने विचारों से हमें अवश्य अवगत कराएं आपकी सभी प्रकार की टिप्पणियों का कमेन्ट बॉक्स में स्वागत है । इस कहानी को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

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विचारक्रांति टीम के सदस्य के रूप में लिखने के अलावा इस ब्लॉग के संचालन हेतु अन्य चीजों का प्रबंधन भी देखती हूँ ...सामान्य एवं आधारभूत जानकारियों को एकत्र करने एवं लिखने का शौक है । एक फुल टाइम गृहणी एवं पार्ट टाइम ब्लॉगर के रूप में समय और मूड के अनुसार सामान्य ज्ञान सहित विविध विषयों पर लिखतीं हूं ... । अच्छा पढ़ने और अच्छा लिखने की कोशिश जारी है ...

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