Home प्रेरणा (Motivation) बहिर्मुखी व्यक्तित्व आपकी सफलता का सोपान

बहिर्मुखी व्यक्तित्व आपकी सफलता का सोपान

Personality Types : Introvert Vs Extrovert

दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि पर्याप्त योग्यता, समुचित ज्ञान, समझ और उसको implement  करने की काबिलियत होने के बावजूद कई लोग अपने जीवन में उस ऊंचाई को हासिल नहीं कर पाते हैं ; जिसे अपनी योग्यता के आधार पर उनको प्राप्त करना चाहिए था.

कभी आपने सोचा ऐसा क्यों होता है ? क्यों एक महान व्यक्तित्व को उसके ज्ञान के अनुरूप सामाजिक प्रतिष्ठा की प्राप्ति नहीं होती है? क्यों उनका सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन ऊंचाई को प्राप्त नहीं कर पाता है ? अगर आपने इस पर ध्यान नहीं दिया है, तो इस लेख को पढ़ने के बाद शायद आप कुछ सोच पाएंगे ? अगर आपने ध्यान दिया है और हमारी विवेचना से अलग आपकी कोई राय है तो  तो निश्चित ही हमें अवगत कराएं कमेंट बॉक्स में लिख कर.

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. और सामाजिक प्राणी होने के नाते एक दूसरे से अपनी भावनाओं का सही आदान प्रदान करना हमारे सामाजिक जीवन में हमारी सफलता का बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है. ऐसे में ऐसा कोई व्यक्ति जो अपने आपको सामाजिक मानदंडों के आधार पर  अभिव्यक्त नहीं कर पाएगा स्वयं को सामाजिक जीवन में स्थापित करने के लिए उसे निश्चय ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

हां, दोस्तों यह सच है कि अगर आप अपने आप को सही से अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे तो सामाजिक संदर्भों में आप की प्राप्ति हमेशा आपकी योग्यता से थोड़ी बहुत कम ही रहेगी. समुचित सफलता से वंचित रह जाने का एक एक बड़ा कारण है अपने आप को  अभिव्यक्त ना कर पाना …

मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर हमारे  व्यक्तित्व को दो भागों में बांटा  गया है

  1. पहला अंतर्मुखी /Introvert.
  2. दूसरा बहिर्मुखी व्यक्तित्व / Extrovert personality.

अंतर्मुखी व्यक्ति अपनी भावनाओं को सार्वजनिक तौर पर प्रस्तुत करने  में असहजता महसूस करता है और स्वयं के साथ अकेले में स्वयं को ज्यादा  ऊर्जावान अनुभव करता है.  ऐसे व्यक्ति को अगर किसी  crowd  का सामना करना पड़े ,बहुत सारे लोगों के बीच कुछ संवाद करना पड़े ,तो स्वयं को बहुत  ही  असहाय महसूस करता है.

बहिर्मुखी व्यक्तित्व का मालिक अपने आप को मानव समूह के बीच में बहुत ही सहज अनुभव करता है और वह अपनी बात भीड़ में भी बहुत आसानी से रख पाता है. अंतर्मुखी व्यक्तित्व के उलट  बहिर्मुखी व्यक्तित्व के लोग अकेले में असहाय महसूस करते हैं, उन्हें अकेले रहना रास नहीं आता.  यानी लोगों के बीच रहना ज्यादा पसंद होता है .

अपने आप को ठीक से अभिव्यक्त ना कर पाने की वजह से जिंदगी में हम समुचित सफलता प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं.यहां हम आपके साथ कुछ tips  शेयर कर रहे हैं जिसका पालन करके, जिस पर अमल करके आप अपनी अंतर्मुखी व्यक्तित्व को बहिर्मुखी व्यक्तित्व में परिवर्तित करने का प्रयास कर सकते हैं. जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन को प्रभावी बना कर सफलताओं के नए द्वार  खोलेंगी…




प्रभावी व्यक्तित्व बनाने हेतु टिप्स:

  • अच्छे श्रोता बनिए :- एक अच्छा श्रोता बनना, एक अच्छे वक्ता बनने की पहली सीढ़ी मानी जाती है.  जब आप विभिन्न विशेषज्ञों को सुनेंगे  तो इससे आपके ज्ञान के साथ-साथ आपके संप्रेषण की क्षमता में भी वृद्धि होगी. आप उन बारीकियों को समझ पाएंगे  जिनकी मदद से कोई व्यक्ति अपने आप को सार्वजनिक मंचों पर बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत कर पाता है.  इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण बात आपके साथ साझा करना चाहता हूं कि इस दुनिया में हर व्यक्ति कुछ न कुछ कहना चाहता है चाहे वह इंट्रोवर्ट हो या एक्सट्रोवर्ट और हर व्यक्ति ऐसे लोगों को सबसे अधिक पसंद करता है, जो कि उसकी  बातों को सुनने में दिलचस्पी रखता है. तो एक अच्छा श्रोता बन कर के आप ऐसे लोगों के प्रिय पात्र बन सकते हैं, और फिर उनके साथ  अपनी भावनाओं को साझा कर सकते हैं.
  • संकोच  त्याग कर मेल-मिलाप बढ़ाइए:-  अगर आप लोगों से मिलेंगे-जुलेंगे नहीं, तो कभी भी अपने आप को पूर्णत:  अभिव्यक्त करने में सफलता प्राप्त करने से वंचित ही पाएंगे .आप शुरू में अपने परिवार के लोगों से, अपने दोस्तों मित्रों से अपनी भावनाओं का आदान प्रदान करिए. ऐसी सामान्य चीजों पर नजर रखिए जो उनकी चर्चाओं में आम होता है जैसे क्रिकेट, राजनीति, बॉलीवुड जैसे विषय  हमारे भारतीय समाज में बहुत ही लोकप्रिय है. आप इन विषयों के बारे में थोड़ी जानकारी  बढ़ा कर उनके साथ अपने बातचीत को रोमांचक बना सकते हैं. इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप एक वक्ता के रूप में  अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो पाएंगे.इस प्रकार आप अपने व्यक्तित्व को और प्रभावी बनाने की यात्रा में एक और अहम् पड़ाव को पार भी कर पाएंगे 
  • अपने बॉडी लैंग्वेज में सुधार कीजिए:- आपका हाव-भाव, आपकी बॉडी लैंग्वेज आपके संवाद को रुचिकर बनाने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए जब भी आप किसी से बात कर रहे हों तो अपने बॉडी लैंग्वेज(Body-Language) को सहज बनाये रखिए. ताकि सामने वाले को ऐसा ना लगे कि आप उसके साथ अभद्रता कर रहे हैं. या आप उसे नजरअंदाज कर रहे हैं. शारीरिक संवाद का जन्म किसी भी बोली या भाषा से पहले हुआ हुआ है. और एक सामाजिक प्राणी(Social animal ) के रूप में आज भी हमारे लिए बॉडी लैंग्वेज, हाव भाव(Gesture&Posture) का महत्व हमारी मौखिक भाषा(vocal language) से बढ़कर है, कमतर तो कतई नहीं. अतः प्रभावी व्यक्तित्व की प्राप्ति में बॉडी लैंग्वेज बहुत अहम् है ,इसका ध्यान जरूर रखिये.





  • सार्वजनिक मंच पर बोलिए :- सार्वजनिक मंच पर बोलने की कोशिश करिए. अगर आपको ऐसा कोई भी मौका मिले तो उसे छोड़िए मत. मंच पर पहुंच करके अपनी बात  रखिए.अपनी भावनाओं को व्यक्त करिये. ऐसा करने से  आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और आप हर दिन अपने को बेहतर बनाते चले जाएंगे. इसके लिए आपको ऊपर बताई गई तीनों चीजों पर यानी कि एक अच्छा श्रोता बनने पर मेल-जोल बढ़ाने और अपनी बॉडी लैंग्वेज को  सुधारने पर भी ध्यान देना पड़ेगा. जब आप तीनो काम करेंगे तो निश्चित रूप से आप बिना किसी डर या खौफ के किसी भी सार्वजनिक मंच पर अपनी बात को रख पाएंगे. जब सार्वजनिक मंच पर या अपने दोस्तों  के साथ ग्रुप डिस्कशन में आप अपनी बात को रखने की कोशिश करेंगे, तो आप पाएंगे कि उत्तरोत्तर  आप में एक सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और आप खुद को अधिक ऊर्जावान एवं अधिक आत्मविश्वासी व्यक्ति के रुप में रूपांतरित होता हुआ महसूस कर पाएंगे…
  • खुद पर विश्वास  करना सीखिए :-  खुद पर यकीन करना, अपने आप पर भरोसा करना, स्वयं पर विश्वास करना यह किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए सबसे पहला और सबसे अहम चीज है. सबसे महत्वपूर्ण चीज है. जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे  कि अमुक काम आप कर पाएंगे तब तक आप की दक्षता(efficiency) अधूरी ही रहेगी. हमारे अंदर का आत्मविश्वास किसी काम को पूर्णता की ओर ले जाने की आधी गारंटी होती है. अगर आप एक आत्मविश्वासी व्यक्ति हैं और आत्मविश्वास के साथ किसी काम को करने के लिए आगे बढ़ते हैं तो यकीन मान के चलिए कि आपने आधा रास्ता तो यूं ही तय कर लिया है. आधे के लिए आपको काम करना है. और आत्मविश्वास के सहारे आप जरूर अपनी मंजिल तक पहुंच जायेंगे.

अंत में…

मित्रों अंत में एक बात साझा करते हुए अपनी बात खत्म करेंगे कि ना तो बहिर्मुखी व्यक्तित्व extrovert personality का मालिक होना सफलता की गारंटी है. ना ही अंतर्मुखी व्यक्तित्व introvert personality   का होना किसी किसी भी प्रकार से असफलता का कारण.   हमें हमारे व्यक्तित्व को, हमें हमारी पर्सनालिटी को संतुलित(balance) रखना चाहिए यानी कि हमारे भीतर अंतर्मुखी व्यक्तित्व और बहिर्मुखी व्यक्तित्व  दोनों के गुण होने चाहिए. अगर हम किसी भी एक वर्ग(category) में बिल्कुल अपने आप को फिट कर देंगे तो यह हमारे दैनंदिन, सामाजिक जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होगा एवं नि:संदेह हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

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