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Rakshabandhan Essay in Hindi | रक्षाबंधन पर निबंध

रक्षाबंधन पर निबंध(rakshabandhan essay in hindi) इस आर्टिकल में हमने रक्षाबंधन पर एक तथ्यात्मक लेख प्रस्तुत किया है।  मैंने इसमें रक्षाबंधन क्या है ? हम रक्षाबंधन क्यों मानते हैं ? आदि प्रश्नों का उत्तर लिखने का प्रयास किया है । जिसमें तथ्यों की पुनरावृत्ति नहीं करके एक तारतम्यता बरकरार रखने की कोशिश की गई है। यदि आप रक्षाबंधन के बारे में जानना चाहते हैं तो मैं यह कह सकती हूँ कि प्रस्तुत लेख -” रक्षाबंधन पर निबंध ” इस विषय पर हिन्दी में इंटरनेट पर उपलब्ध कुछ अच्छे लेखों में से एक होने वाला है ।

इस लेख में आपको रक्षा बंधन से संबंधित प्रायः सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे । रक्षाबंधन पर निबंध(essay on rakshabandhan) में आप अपनी सभी जिज्ञासाओं का उत्तर प्राप्त करेंगे। आगे लिखे गए इस निबंध से प्रेरणा लेकर आप निर्धारित शब्द सीमा के अंदर तथ्यों का संक्षेपण कर सुंदर निबंध भी लिख पाएंगे। ऐसा मेरा विश्वास !

आगे बढ़ने से पहले आप सभी को रक्षाबंधन की अनेकों – अनेक शुभकामनाएं

भारत एक उत्सव प्रधान देश है,जहां पर विभिन्न धर्मों के लोग अपनी आस्था और विश्वास के आधार पर अपना अपना त्यौहार मनाते  हैं। यह त्योहार हमारे पारिवारिक तथा सामाजिक संबंधों में प्रेम का रस घोल कर उन्हें और मजबूती और विश्वास प्रदान करते हैं । रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम पूर्ण पवित्र सम्बन्ध को समर्पित एक ऐसा ही त्यौहार है जिसे इस पवित्र रिश्ते को आदर और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में बहुत प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है।  इसके आरंभ के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं हैं तथा इससे कई सारे ऐतिहासिक घटनाएं भी जुडी हुई हैं। इस तरह यह रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का तथा दुनिया में अपने आप में एक अनूठा त्यौहार है,जहां भाई बहन के पवित्र सम्बन्ध को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है । 

क्या है रक्षाबंधन

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्योहार है जिसे मुख्य रूप से हिंदू तथा जैन  धर्म के लोग मनाते हैं।  वैसे तो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के कारण यह किसी धर्म विशेष का त्यौहार रह नहीं गया है , फिर भी मुख्य रूप से इसे हिन्दू धर्म के लोग मनाते हैं। 

रक्षाबंधन में बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं। बहनें अपने भाई का मुँह मीठा करवाती हैं तथा उसके सुस्वास्थ्य समृद्धि और दीर्घायु होने की कामना करती है।  भाई भी यथासंभव उपहार बहन को भेंट करता है तथा जीवन पर्यंत उसकी रक्षा का वचन देता है। 

रक्षाबंधन उत्सव का स्वरूप और परंपरा

कैसे मानते हैं रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में बड़े ही हर्ष और उल्लास के संग भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रेम के प्रतीक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।  बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर भाई की कलाई में राखी बांधती हैं तथा अपने भाई की उन्नति और लंबी उम्र की प्रार्थना करती है।  भाई भी यथासंभव उपहार बहन को भेंट कर बहन की रक्षा का प्रण लेता है।

इस त्यौहार को भाई-बहन के अलावा दूसरे लोग भी मनाते हैं।भारतीय परंपरा के अनुसार गुरु अपने शिष्यों को तथा पुरोहित अपने यजमान को रक्षा सूत्र बांधते हैं।

रक्षाबंधन अपनत्व और स्नेह के बंधन से संबंधों को और मजबूत करता है। यही कारण है कि भाई बहन के इतर अन्य संबंधों में भी राखी बांधने का प्रचलन है।  एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधने का मतलब एक दूसरे की सम्मान के रक्षा  का दायित्व स्वीकार करने से है। 

प्राचीन काल में जब शिष्य गुरुकुल में अपनी शिक्षा समाप्ति के उपरांत घर जाने हेतु गुरु से आशीर्वाद मांगता था , तो गुरु अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे। संस्कृति की परख रखने वाले  बताते हैं कि – इस रक्षा सूत्र को आचार्य इस कामना से अपने शिष्य के हाथ में बांधते थे कि शिष्य अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को अपने भावी जीवन में स्वयं तथा समाज के हित में उपयोग करें। जिससे आचार्य की गरिमा का भी विस्तार हो तथा जगत का कल्याण भी हो। 

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मनाने की तिथि पूर्णिमा का महत्व

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की यह परंपरा सदियों पुरानी रही है।  रक्षाबंधन को हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वैसे तो हमारी संस्कृति में प्रत्येक पूर्णिमा पर कुछ न कुछ उत्सव मनाया जाता है जैसे रक्षाबंधन से पहले की पूर्णिमा पर गुरुओं के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है ,उससे पहले बुद्ध पूर्णिमा और उससे भी पहले चैत्र पूर्णिमा मनाया जाता है। 

हमारी संस्कृति के उत्सव धर्मी होने का सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हर पूर्णिमा को कुछ न कुछ मनाया जाता है जिसमें श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के कर्तव्य और प्रेम को समर्पित उत्सव रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है। 

क्यों मानते हैं रक्षाबंधन

वैसे तो रक्षाबंधन आने की खुशी हरेक भाई और बहन के चेहरे से महसूस की जा सकती है। हमारे देश भारत सहित अन्य देशों में भी भारतीय मूल के लोग रक्षाबंधन बड़े ही धूम धाम से मानते हैं । लेकिन आप जिस रक्षाबंधन को इतने हर्षोल्लास से मनाते हैं … इस रक्षाबंधन को क्यों मनाते हैं इस के बारे में कुछ पता भी है या नहीं … !

यदि आपकों इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं तो इस लेख का अगला हिस्सा आपके सभी प्रश्नों को हल कर देगा । रक्षाबंधन(Rakshabandhan) के सम्बन्ध में कई सारे धार्मिक तथा पौराणिक आख्यान हैं। रक्षाबंधन मनाने के पीछे कई सारे प्रसंगों की चर्चा होती है । जिनमें से कुछ प्रमुख प्रसंगों की चर्चा हम नीचे कर रहें हैं ।

पौराणिक आख्यान(rakshabandhan essay in hindi)

प्रसंग I-देवासुर संग्राम

सबसे पहला प्रसंग देवासुर संग्राम से है। भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार देवासुर संग्राम में वृत्रासुर से युद्ध में देवराज इंद्र को पराजय से बचाने के लिए उनकी पत्नी इंद्राणी शची ने उनके हाथ में अपने तपोबल से अभिमंत्रित कर एक रक्षा सूत्र बांधा था , इस युद्ध में इंद्र विजय हुए। यह घटना सतयुग की है। जिस दिन शची ने इंद्र के हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था वह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था , तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार मानाने की परंपरा है। 

प्रसंग II -कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग

रक्षाबंधन से संबंधित दूसरा आख्यान भगवान श्री कृष्ण से संबंधित है। भगवान कृष्ण ने जब शिशुपाल का वध किया तो सुदर्शन चक्र चलाते समय उनके दाएं हाथ की तर्जनी उंगली कट गई। श्री कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर बाँध दिया था । इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को किसी भी संकट मे सहायता करने का वचन दिया था। भगवान कृष्ण ने  चीर हरण में द्रौपदी की रक्षा कर अपने वचन का मान रखा था। 

प्रसंग III-राजा बलि की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ा तीसरा प्रसंग श्रीमद् भागवत तथा पद्म पुराण के अनुसार राजा बलि से जुड़ा हुआ है ,जो पहलाद के पौत्र थे। भगवान विष्णु स्वयं वामन अवतार लेकर उनसे भिक्षा मांगने आए।  राजा बलि ने गुरु शुक्राचार्य द्वारा मना करने के बावजूद उन्हें दान दिया । जिसमें भगवान विष्णु ने अपने दो पग में धरती और आकाश को नाप लिया तीसरे में राजा को नापकर  उसे पाताल लोक का राजा बना दिया।  

पाताल लोक में राजा बलि ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की और उनसे सदा-सर्वदा अपने साथ रहने का वर मांगा भगवान ने यह वर दे दिया। जब काफी दिनों तक वह अपने घर गोलोक नहीं पहुंचे तब नारद की मदद से माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पहुंची । उसे रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया तथा अपने पति भगवान विष्णु को मुक्त करा अपने साथ ले गयी। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

उपसंहार 

रक्षाबंधन रिश्तो में अपनत्व को बढ़ाकर आपसी स्नेह को और प्रगाढ़ करने वाला एक महान पर्व है।  रक्षाबंधन भाई बहन के निश्छल प्रेम का उत्सव होने के साथ -साथ भारतीय संस्कृति में  समाज के अन्य संबंधों में भी मनाया जाने वाला त्यौहार है ,जिसकी चर्चा हमने ऊपर की है। प्रेम किसी भी सम्बन्ध का की जीवन रेखा है। रक्षाबंधन संबंधों में सम्मान, स्नेह,समझ उत्तरदायित्व और उत्तरोत्तर प्रगाढ़ता को और मजबूत करने वाला एक महापर्व है।  

हमें पूरा विश्वास है कि हमारा यह लेख (rakshabandhan essay in hindi) आपके लिए रुचिकर रही होगी। त्रुटि अथवा किसी भी अन्य प्रकार की टिप्पणियां नीचे कमेंट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं …लिख कर जरूर भेजें ! इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

प्रेम किसी भी सम्बन्ध का की जीवन रेखा है। रक्षाबंधन संबंधों में सम्मान, स्नेह,समझ उत्तरदायित्व और उत्तरोत्तर प्रगाढ़ता को और मजबूत करने वाला एक महापर्व है।   आपको रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

रक्षा बंधन से संबंधित प्रश्न

कब मनाते हैं रक्षाबंधन ?

रक्षाबंधन को हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

कैसे मनाते हैं रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में बड़े ही हर्ष और उल्लास के संग भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रेम के प्रतीक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।  बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर भाई की कलाई में राखी बांधती हैं तथा अपने भाई की उन्नति और लंबी उम्र की प्रार्थना करती है।  भाई भी यथासंभव उपहार बहन को भेंट कर बहन की रक्षा का प्रण लेता है।

रक्षाबंधन कब और कैसे शुरू हुआ?

रक्षाबंधन की शुरुआत कब् हुई इसका कोई ठोस प्रमाण प्रायः नहीं है। परंतु भविष्य पुराण के अनुसार, इसकी शुरुआत देव-दानव युद्ध से हुई थी। जिसकी चर्चा हमने ऊपर की है ।

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