HomeHindiRakshabandhan Essay in Hindi-रक्षाबंधन पर निबंध

Rakshabandhan Essay in Hindi-रक्षाबंधन पर निबंध

रक्षाबंधन पर निबंध ( Rakshabandhan Essay Hindi )

रक्षाबंधन पर निबंध(rakshabandhan essay in hindi) इस आर्टिकल में हमने रक्षाबंधन पर एक तथ्यात्मक निबंध प्रस्तुत किया है।  जिसमें तथ्यों की पुनरावृत्ति नहीं करके एक तारतम्यता बरकरार रखने की कोशिश की गई है।  यदि आप रक्षाबंधन के बारे में जानना चाहते हैं तो भी मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस आर्टिकल रक्षाबंधन पर निबंध(essay on rakshabandhan) में अपने सभी जिज्ञासाओं का उत्तर प्राप्त करेंगे। तथा यहां लिखे गए निबंध से प्रेरणा लेकर आप निर्धारित शब्द सीमा के अंदर तथ्यों का संक्षेपण कर सुंदर निबंध लिख पाएंगे। 

भारत एक उत्सव प्रधान देश है,जहां पर विभिन्न धर्मों के लोग अपनी आस्था और विश्वास के आधार पर अपना अपना त्यौहार मनाते  हैं। यह त्योहार हमारे पारिवारिक तथा सामाजिक संबंधों में प्रेम का रस घोल कर उन्हें और मजबूती और विश्वास प्रदान करते हैं । रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम पूर्ण पवित्र सम्बन्ध को समर्पित एक ऐसा ही त्यौहार है जिसे इस पवित्र रिश्ते को आदर और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में बहुत प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है।  इसके आरंभ के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं हैं तथा इससे कई सारे ऐतिहासिक घटनाएं भी जुडी हुई हैं। इस तरह यह रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का तथा दुनिया में अपने आप में एक अनूठा त्यौहार है,जहां भाई बहन के पवित्र सम्बन्ध को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है । 

प्रस्तावना

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्योहार है जिसे मुख्य रूप से हिंदू तथा जैन  धर्म के लोग मनाते हैं।  वैसे तो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के कारण यह किसी धर्म विशेष का त्यौहार रह नहीं गया है , फिर भी मुख्य रूप से इसे हिन्दू धर्म के लोग मनाते हैं। 

रक्षाबंधन में बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं। बहनें अपने भाई का मुँह मीठा करवाती हैं तथा उसके सुस्वास्थ्य समृद्धि और दीर्घायु होने की कामना करती है।  भाई भी यथासंभव उपहार बहन को भेंट करता है तथा जीवन पर्यंत उसकी रक्षा का वचन देता है। 

Related Post : Independence Day Essay in Hindi-स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

रक्षाबंधन उत्सव का स्वरूप और परंपरा

कब मनाते हैं रक्षाबंधन ?

रक्षाबंधन को हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

कैसे मनाते हैं रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में बड़े ही हर्ष और उल्लास के संग भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रेम के प्रतीक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।  बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर भाई की कलाई में राखी बांधती हैं तथा अपने भाई की उन्नति और लंबी उम्र की प्रार्थना करती है।  भाई भी यथासंभव उपहार बहन को भेंट कर बहन की रक्षा का प्रण लेता है।

इस त्यौहार को भाई-बहन के अलावा दूसरे लोग भी मनाते हैं।भारतीय परंपरा के अनुसार गुरु अपने शिष्यों को तथा पुरोहित अपने यजमान को रक्षा सूत्र बांधते हैं।

रक्षाबंधन अपनत्व और स्नेह के बंधन से संबंधों को और मजबूत करता है। यही कारण है कि भाई बहन के इतर अन्य संबंधों में भी राखी बांधने का प्रचलन है।  एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधने का मतलब एक दूसरे की सम्मान के रक्षा  का दायित्व स्वीकार करने से है। 

प्राचीन काल में जब शिष्य गुरुकुल में अपनी शिक्षा समाप्ति के उपरांत घर जाने हेतु गुरु से आशीर्वाद मांगता था , तो गुरु अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे। संस्कृति की परख रखने वाले  बताते हैं कि – इस रक्षा सूत्र को आचार्य इस कामना से अपने शिष्य के हाथ में बांधते थे कि शिष्य अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को अपने भावी जीवन में स्वयं तथा समाज के हित में उपयोग करें। जिससे आचार्य की गरिमा का भी विस्तार हो तथा जगत का कल्याण भी हो। 

rakshabandhan essay in hindi, rakshabandhan,

मनाने की तिथि पूर्णिमा का महत्व

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की यह परंपरा सदियों पुरानी रही है।  रक्षाबंधन को हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वैसे तो हमारी संस्कृति में प्रत्येक पूर्णिमा पर कुछ न कुछ उत्सव मनाया जाता है जैसे रक्षाबंधन से पहले की पूर्णिमा पर गुरुओं के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है ,उससे पहले बुद्ध पूर्णिमा और उससे भी पहले चैत्र पूर्णिमा मनाया जाता है। 

हमारी संस्कृति के उत्सव धर्मी होने का सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हर पूर्णिमा को कुछ न कुछ मनाया जाता है जिसमें श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के कर्तव्य और प्रेम को समर्पित उत्सव रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है। 

Related Post : Air Pollution Essay-वायु प्रदूषण पर निबंध

पौराणिक आख्यान(rakshabandhan essay in hindi)

रक्षाबंधन(Rakshabandhan) के सम्बन्ध में कई सारे धार्मिक तथा पौराणिक आख्यान हैं। 

सबसे पहला प्रसंग देवासुर संग्राम से है। भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार देवासुर संग्राम में वृत्रासुर से युद्ध में देवराज इंद्र को पराजय से बचाने के लिए उनकी पत्नी इंद्राणी शची ने उनके हाथ में अपने तपोबल से अभिमंत्रित कर एक रक्षा सूत्र बांधा था , इस युद्ध में इंद्र विजय हुए। यह घटना सतयुग की है। जिस दिन शची ने इंद्र के हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था वह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था , तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार मानाने की परंपरा है।  

रक्षाबंधन से संबंधित दूसरा आख्यान भगवान श्री कृष्ण से संबंधित है। भगवान कृष्ण ने जब शिशुपाल का वध किया तो सुदर्शन चक्र चलाते समय उनके दाएं हाथ की तर्जनी उंगली कट गई। श्री कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर बाँध दिया था । इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को किसी भी संकट मे सहायता करने का वचन दिया था। भगवान कृष्ण ने  चीर हरण में द्रौपदी की रक्षा कर अपने वचन का मान रखा था। 

रक्षाबंधन से जुड़ा तीसरा प्रसंग श्रीमद् भागवत तथा पद्म पुराण के अनुसार राजा बलि से जुड़ा हुआ है ,जो पहलाद के पौत्र थे। भगवान विष्णु स्वयं वामन अवतार लेकर उनसे भिक्षा मांगने आए।  राजा बलि ने गुरु शुक्राचार्य द्वारा मना करने के बावजूद उन्हें दान दिया । जिसमें भगवान विष्णु ने अपने दो पग में धरती और आकाश को नाप लिया तीसरे में राजा को नापकर  उसे पाताल लोक का राजा बना दिया।  

पाताल लोक में राजा बलि ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की और उनसे सदा-सर्वदा अपने साथ रहने का वर मांगा भगवान ने यह वर दे दिया। जब काफी दिनों तक वह अपने घर गोलोक नहीं पहुंचे तब नारद की मदद से माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पहुंची । उसे रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया तथा अपने पति भगवान विष्णु को मुक्त करा अपने साथ ले गयी। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

Related Post : डाकिया पर निबंध-Essay on Postman

उपसंहार 

रक्षाबंधन रिश्तो में अपनत्व को बढ़ाकर आपसी स्नेह को और प्रगाढ़ करने वाला एक महान पर्व है।  रक्षाबंधन भाई बहन के निश्छल प्रेम का उत्सव होने के साथ -साथ भारतीय संस्कृति में  समाज के अन्य संबंधों में भी मनाया जाने वाला त्यौहार है ,जिसकी चर्चा हमने ऊपर की है। प्रेम किसी भी सम्बन्ध का की जीवन रेखा है। रक्षाबंधन संबंधों में सम्मान, स्नेह,समझ उत्तरदायित्व और उत्तरोत्तर प्रगाढ़ता को और मजबूत करने वाला एक महापर्व है।  

हमें पूरा विश्वास है कि हमारा यह लेख (rakshabandhan essay in hindi) आपके लिए रुचिकर रही होगी। त्रुटि अथवा किसी भी अन्य प्रकार की टिप्पणियां नीचे कमेंट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं …लिख कर जरूर भेजें ! इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

बने रहिये Vichar Kranti.Com के साथ । अपना बहुमूल्य समय देकर लेख पढ़ने के लिए आभार ! आने वाला समय आपके जीवन में शुभ हो ! फिर मुलाकात होगी किसी नए आर्टिकल में ..

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो आपको हमारा फेसबुक पेज जरुर पसंद आएगा…! हमसे जुड़ने के लिए इस लिंक >> विचारक्रांति फेसबुक पेज << पर क्लिक करके आप हमसे Facebook पर जुड़ सकतें हैं

निवेदन : – हमें अपनी टीम में ऐसे लोगों की जरूरत है जो हिन्दी में अच्छा लिख सकते हों । यदि आप हमारी टीम में एक कंटेन्ट राइटर के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो आगे दिए गए ईमेल पते पर मेल कीजिए । प्रत्येक लेख और आपकी लेखन क्षमता के हिसाब से उचित राशि प्रदान की जाएगी ।


इसके अलावा यदि कोई धनराशि प्राप्त किए बिना, आप हिंदी में कुछ मोटिवेशनल अथवा अन्य आर्टिकल लिख कर हमारा सहयोग करना चाहते हैं तो भी आपका स्वागत है ! लिख भेजिए अपने फोटो के साथ हमारे Email पते पर । हम उसे समीक्षा के पश्चात आपके नाम से प्रकाशित कर देंगे । हमसे जुड़ने के लिए संपर्क कीजिये Email :contact@vicharkranti.com

Admin
विचारक्रांति(Vichar-Kranti.Com) पर पढ़िए जीवनी, सफलता की कहानियां,प्रेरक तथ्य तथा जीवन से जुडी और भी बहुत कुछ और बनिए विचारक्रांति परिवार का हिस्सा . विचारक्रांति जीवन के हर क्षेत्र में....

इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया,अपनी बातें यहां नीचे कमेंट बॉक्स में लिख कर हम तक जरूर भेजिए.सभी नए पोस्ट के ईमेल नोटिफिकेशन पाने के लिए नीचे चेकबॉक्स को टिक करिये. धन्यवाद...!

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

कुछ नए पोस्ट्स

संबद्ध लिंक अमेजन -

पढिए अच्छी किताबों मे
सफलता के सीक्रेट

Vichar-Kranti

पढ़िए जीवन बदलने वाले Ideas,महापुरुषों के प्रेरक वचन,जीवनी, करियर के विकल्प और भी बहुत कुछ...जुड़िये विचारक्रांति से

error: Content is protected !!