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full form of pos -पीओएस के बारे में पूरी जानकारी

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इस ब्लॉग पोस्ट(full form of POS ) को  पूरा पढ़ने के उपरांत आप पीओएस का फुल फॉर्म, POS में लगने वाले महत्वपूर्ण components , यह किसके लिए उपयोगी है तथा इसे कैसे और कहां से लिया जा सकता है ? इन सभी प्रश्नों का उत्तर आप जान पाएंगे । 

इस पूरे पोस्ट से हमारे ऐसे साथियों को सहायता प्राप्त होगी जो कि अपने बिजनेस को अपग्रेड करना चाहते हैं और डिजिटल पेमेंट की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं । इसमें POS के बारे मे प्रारम्भिक जानकारी से लेकर वृहत स्तर की जानकारी देने का प्रयास हमने किया है ।

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बाकी जानकारियां बिंदुवार ,संक्षिप्त एवं सटीक हो ताकि यह लेख आपको कम समय में आपकी जिज्ञासाओं का उत्तर दे सके यही हमारा प्रयास है ।

full form of pos-पोस क्या है

Full Fom of POS

POS  का फूल फॉर्म होता है पॉइंट ऑफ सेल । Full form of POS is – Point of Sale .  

क्या होता है POS

किसी भी व्यावसायिक केंद्र में पॉइंट ऑफ सेल का तात्पर्य उस स्थान से है जहां ग्राहक खरीदी गई वस्तु अथवा सेवाओं के लिए तय कीमत अर्थात धन का भुगतान करता है। आमतौर पर हम इसे चेक आउट पॉइंट भी कहते है ।

यहां व्यावसायिक से केंद्र से हमारा तात्पर्य ऐसे सभी संस्थानों अथवा उपक्रमों से है जहां किसी भी प्रकार की वस्तु अथवा सेवा का क्रय विक्रय किया जाता है । इसमे साधारण दुकान से लेकर बड़े बड़े शॉपिंग मॉल सहित अन्य व्यापारिक केंद्र भी आएंगे । 

POS मशीनों का उपयोग कहाँ होता है 

पीओएस का इस्तेमाल हर उस जगह पर संभव है और होने भी लगा है, जहां ग्राहक किसी सामान अथवा सेवा के लिए पैसों का भुगतान करता  हो ।  आजकल इसका उपयोग ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रोडक्ट डिलीवरी ब्वॉय से लेकर शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल तक और परचून की दुकान से लेकर चालान करने में पुलिस वाले भी करने लगे हैं।  जो अपने आप में इसके महत्व तथा भविष्य में और अधिक उपयोग की संभावना को दर्शाता है ।

कैसे मिलता है दुकानदार को पैसा

How card swiping machine/pos works?

ग्राहक खरीदे गए सामान का भुगतान करने हेतु अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड( credit or debit card) दुकानदार को देता है । दुकानदार कार्ड को पी ओ एस टर्मिनल में या तो स्वाइप करता है यह लगाकर छोड़ देता है । 

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Point of Sale टर्मिनल एक छोटा सा मशीन जिसे हम प्रचलित भाषा में  कार्ड स्वाइपिंग मशीन कहते हैं में एक  प्रोसेसर (Processor)  होता है। जिसके द्वारा पेमेंट प्रोसेस करने वाली नेटवर्क को जो कि इंडिया में मुख्य रूप से (VISA , MASTERCARD तथा Ru Pay है ) को एक रिक्वेस्ट भेजा जाता है ।

वहां से कार्ड मुहैया  करने वाले बैंक तक यह रिक्वेस्ट जाता है । यदि ग्राहक के कार्ड से लिंक्ड अकाउंट में पैसे हैं तो स्वीकृति अथवा अस्वीकृति पुनः इसी स्टेप्स को फॉलो करते हुए दुकानदार के pos terminal तक पहुंच जाता है ।

लेनदेन सफल होने पर दुकानदार को pos मशीन से दो पर्ची (receipt) मिलती है जिसमे एक वो खुद रखता है और दूसरा ग्राहक को देता है ।

अब दुकानदार दुकान बंद करने से पहले शाम में या किसी अन्य निर्धारित समय पर पूरे दिन के लेनदेन को बैच प्रोसेसिंग (Batch Processing)के लिए भेजता है । पेमेंट प्रोसेसिंग नेटवर्क से रुपए मर्चेंट के बैंक अकाउंट में आ जाता है, तथा बैंक खरीदे गए सामान और सेवा के लिए निर्धारित समय पर बिल ग्राहक को भेज देता है । 

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POS Machine के प्रमुख घटक 

पॉइंट ऑफ सेल बहुत से अलग-अलग घटकों से मिलकर बनता है । एक point of sale system का काम इन्वेंटरी मैनेजमेंट से लेकर ग्राहक को खरीदे गए सामान के बदले में उससे पैसे लेकर बिल देने तक के सभी कार्यों को सुचारु ढंग से संचालित करना है । 

बिजनेस को बढ़ाने तथा तेजी से  बढ़ते अपने व्यापार को सुचारू ढंग से संभालने के लिए भी पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम की जरूरत पड़ती है । पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम कई सारे अवयवों से मिलकर बने होते हैं । जिसे मुख्य रुप दो भागों में विभाजित कर सकते हैं । 

  1. हार्डवेयर (Hardware) और 
  2. सॉफ्टवेयर (Software)

बिना सॉफ्टवेयर के हार्डवेयर का कोई महत्व नहीं है तो अपने बिजनेस को सही से चलाने के लिए कोई अच्छा सा bussiness software जो Easy to use  हो का हमें उपयोग करना चाहिए । 

एक POS System में उपयोग में आने वाले हार्डवेयर इस प्रकार से हैं :

  • ऑल इन वन वर्क स्टेशन (जिसमे कीबोर्ड,मानिटर, Cash Drawer शमिल हैं )
  • सर्वर (server)
  • बारकोड स्कैनर (Barcode Scanner)
  • रिसिप्ट प्रिंटर (Receipt Printer )
  • मैग्नेटिक स्ट्रिप रीडर (Magnetic Stripe Reader)

पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम में इसके अलावा भी अन्य चीजें शामिल हो सकती हैं , जिसे अपनी जरूरत और बिजनेस में वृद्धि के हिसाब से शामिल किया जा सकता है । 

pos full form,

POS के प्रकार 

उपयोगिता के आधार पर पीओएस अलग-अलग तरह के  हो सकते हैं , जहां उपयोग के आधार पर उनमें कुछ हार्डवेयर को जोड़ा या घटाया जा सकता है  तथा सॉफ्टवेयर में भी वांछित परिवर्तन किए जा सकते हैं । 

खुदरा व्यापारियों के लिए को पीओएस की जरूरत इन्वेंटरी मैनेजमेंट, खत्म होने वाली वस्तुओं की सूचना तथा सामानों की बिक्री के विश्लेषण (कौन सा सामान ज्यादा या कम बिक रहा है ) करने में होता है । उनके लिए सस्ता और टिकाऊ समाधान mPOS, Cloud-Based POS तथा multichannel POS ही है । 

टच स्क्रीन कंप्यूटर ,सेल्फ सर्विस कियोस्क ,मोबाईल पीओएस, स्मार्ट फोन, टैबलेट तथा  कार्ड और चिप रीडर सहित अन्य कई प्रकार के POS डिवाइस उपलब्ध हैं । जिन्हें कोई भी व्यापारी अपने बिजनेस के आकार के आधार पर अपना सकता है । 

पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम को हम उपयोग और तकनीक के आधार पर मुख्यतः  चार भागों में विभाजित कर सकते हैं ।  

  1. Small Business POS
  2. Retail POS
  3. Cloud POS &
  4. Mobile POS

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POS टर्मिनल क्या करता है ?

full form of pos के बारे में पढ़तें हुए यदि आप यहां तक गए हैं तो फिर आपके लिए पोस से संबंधित कुछ और बातों को जानना उपयोगी ही होगा ।

पीओएस टर्मिनल द्वारा संपन्न किए जाने वाले मुख्य कार्यों की सूची कुछ इस प्रकार से है:

  • क्रेडिट / डेबिट कार्ड की प्रोसेसिंग (Credit/ Debit Card processing)
  • भुगतान प्राप्त करना (Payment receiving)
  •  विक्रय  रसीद छापना । (Printing purchase receipt.)
  •  वस्तुओं की सूची प्रबंधन ( inventory management)
  •  वस्तु विशेष की  बिक्री रिपोर्ट बनाना (preparation of item specific sales report)
  • कम होती वस्तुओं की चेतावनी देना (Low inventory alert)
  • ग्राहक द्वारा की गई खरीद का ब्यौरा रखना  (Customer Purchase history)
  • और अन्य प्रकार की रिपोर्ट (other types of reports)

Pos से लाभ और हानि

लाभ :

  • ग्राहकों को खरीदारी के लिए नकदी लेकर घूमने की समस्या से छुटकारा ।
  • हर लेन-देन करने  का रिकॉर्ड होना ।
  • कब क्या और कितना खरीदा अथवा बेचा इस समस्या से छुटकारा इसका हिसाब रखने की जरूरत नहीं क्योंकि यह सारी चीजें ग्राहकों के लिए बैंक अकाउंट में रिफ्लेक्ट हो जाएंगी तथा विक्रेता के लिए POS में ।
  • ब्लैक मनी और करप्शन से छुटकारा ।
  • पैसे का लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी और सरकार को पूरा टैक्स मिलेगा । 
  • कैश लेस अर्थव्यवस्था बनाने में मदद । 

नुकसान 

  • ) फ्रॉड की संभावना बनी रहती है । (अभी हमारे देश मे  बहुत से लोग हैं जिन्हें pos कैसे उपयोग किया जाए की जानकारी नहीं है जिससे कुछ गड़बड़ होने का डर तो बना ही रहता है । )
  • ) हर ट्रांजैक्शन पर बैंक कुछ अतिरिक्त चार्ज लगाती  है जिससे वस्तुओं की ख़रीददारी महंगी हो जाती है । 
  • ) सामान खरीदने के लिए बैंक अकाउंट का होना आवश्यक है । 

 कहां से और कैसे मिलेगा POS 

लगभग जितने भी प्रसिद्ध बैंक हैं सब पीओएस/POS और खासकर कार्ड स्वाइपिंग मशीन उपलब्ध करवाती हैं जिनमें से कुछ प्रसिद्ध नाम HDFC बैंक, ICICI , SBI तथा केनरा बैंक आदि हैं ।

यदि आप अपने छोटे या बड़े बिजनेस के लिए POS Machine चाहते हैं ,तो इसके लिए आपका संबंधित बैंक में एक Current Account होना चाहिए । बैंक आपसे कुछ सिक्योरिटी मनी भी जमा करवा सकती है जोकि बहुत सामान्य रकम होगी ।

और दो-चार दिनों के अंदर बैंक का कोई प्रतिनिधि आकर आपके यहां POS लगा जाएगा और उसे कैसे चलाना है ये भी आपको अच्छे से समझा जाएगा ।

Note :- प्राइवेट बैंक से काम थोड़ा जल्दी हो सकता है लेकिन जहां आपका पक्का भरोसा हो वहीं से लगवाएं POS…!

हमें पूरा विश्वास है कि हमारा यह लेख( full form of pos -पीओएस के बारे में पूरी जानकारी ) आपको ज्ञानवर्धक लगा होगा, त्रुटि अथवा किसी भी अन्य प्रकार की टिप्पणियां नीचे कमेंट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं …लिख कर जरूर भेजें ! इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर शेयर भी करे क्योंकि Sharing is Caring !

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