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भारतीय परमाणु अनुसंधान एवं BARC

BARC एवं भारतीय परमाणु अनुसंधान

भारत में परमाणु ऊर्जा के जनक डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा है 1945 में दोराबजी टाटा के सहयोग से उन्होंने नाभिकीय/परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च/Tata Institute of Fundamental Research (TIFR) की स्थापना की

भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को गति देने के लिए डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा ने 1954 में  Atomic Energy Establishment, Trombay (AEET) की स्थापना की ,लेकिन 1966 में  हवाई दुर्घटना में डॉक्टर भाभा की मृत्यु के पश्चात इस संस्थान का नाम परिवर्तित कर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रख दिया गया|

भारत में मौजूद ईंधन एवं उपयोग की चुनौतियाँ

भारत के पास यूरेनियम के प्राकृतिक भंडार तो सीमित हैं लेकिन थोरियम का भंडार असीमित (बहुत ही बड़ा) है थोरियम का उपयोग कर परमाणु ऊर्जा  बनाने के लिए भारत में त्रिस्तरीय न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम/Three Stage Nuclear Power Program यानि परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर बल दिया गया है |उपयोग  किए गए ईंधन का रिप्रोसेसिंग तथा अवशिष्ट का नियोजन यानि रिप्रोसेसिंग तथा वेस्ट मैनेजमेंट त्रिस्तरीय ऊर्जा कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे संबंधित सभी  तकनीक एवं प्रौद्योगिकियों को पूर्ण रूप से स्वदेश में ही विकसित किया गया है .यूरेनियम एवं प्लूटोनियम को अलग करके रिसाइकिल किया जाता है तथा अन्य रेडियोएक्टिव पदार्थ को भी उनके अर्ध जीवन काल के आधार पर अलग करके इस प्रकार से रखा जाता है ताकि पर्यावरण पर उसका न्यूनतम प्रभाव पड़े.

परमाणु ऊर्जा तकनीक के क्षेत्र में भारत

डॉ होमी जहांगीर भाभा ने भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को गति देने के लिए एक ट्रेनिंग स्कूल की भी स्थापना की थी जिससे कि भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए भविष्य में दक्ष एवं कुशल मानव संसाधन सहजता से उपलब्ध किया जा सके| नाभिकीय रिएक्टर में थोरियम का उपयोग करने में कुछ ही देशों ने महारत हासिल की है लेकिन भारत ने भी हाल के वर्षों में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने में सफलता प्राप्त की है इसके साथ ही एडवांस्ड हेवी वॉटर रिएक्टर बनाने की दिशा में भी तीव्रता से प्रयासरत है.

परमाणु ऊर्जा अनुसन्धान एवं BARC

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर वर्तमान भारत में मौजूद सभी परमाणु ऊर्जा अनुसंधान एवं उद्योग केंद्र की  जननी है |डॉक्टर होमी जहांगीर बाबा की अध्यक्षता में 10 अगस्त 1948 को परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की गई और इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की यात्रा प्रारंभ हुई |1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई और परमाणु ऊर्जा के सभी कार्यक्रम प्रधानमंत्री के तत्वावधान में किए जाते हैं .

परमाणु अनुसंधान का प्रमुख केंद्र BARC

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) मुंबई के ट्राम्बे में स्थापित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परमाणु विज्ञान एवं संबद्ध क्षेत्र में कार्य करने वाला भारत का एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र है इसका परमाणु विद्युत कार्यक्रम तथा खनिज क्षेत्र एवं उद्योग क्षेत्र की इकाइयां भी अनुसंधान एवं विकास के कार्यक्रम में सहायता प्रदान करती हैं इस केंद्र ने कृषि उद्योग औषधि आइसोटेप्स के चिकित्सा उपयोग के साथ साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए महत्वपूर्ण प्रयोग इकाइयों का विकास किया है.

BARC परमाणु ऊर्जा और रिएक्टर

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में रिएक्टर टेक्नोलॉजी में विकास एवं अनुसंधान, ईंधन पुनर्चक्रण, अपशिष्ट पदार्थों के सही रखरखाव, आइसोटोप्स  के समुचित उपयोग,रेडिएशन टेक्नोलॉजी का स्वास्थ्य के लिए उपयोग, कृषि एवं पर्यावरण, लेजर टेक्नोलॉजी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन एवं रिएक्टर कंट्रोल तथा पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य करने वाली युवा एवं कर्मठ  विज्ञान कर्मियों की एक बड़ी टीम है जिसका मुख्य उद्देश्य मूलभूत अनुसंधान के साथ साथ तकनीकी एवं तकनीकी प्रौद्योगिकियों के विकास को नई ऊंचाई देना है.

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के कुछ प्रमुख परमाणु रिएक्टर

  • अप्सरा
  • साइरस
  • जरलीना
  • पूर्णिमा
  • ध्रुव एवं
  • कामिनी

भारत में परमाणु ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा हेतु नीति

भारत में विद्युत उत्पादन के लिए नाभिकीय ऊर्जा के प्रयोग के संबंध में सावधानीपूर्वक कदम आगे बढ़ाए हैं इसके लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम बनाकर उसका क्रियान्वयन किया गया इसके अंतर्गत निर्धारित उद्देश्यों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध तथा उच्च संभावना वाले तत्व जैसे कि यूरेनियम एवं थोरियम का उपयोग भारतीय नाभिकीय विद्युत वितरण में नाभिकीय ईंधन के रूप में करने का प्रारूप तय किया गया भारत में इन दोनों तत्वों के अनुमानित प्राकृतिक भंडार इस प्रकार हैं –

  • प्रकृति यूरेनियम भंडार                               लगभग 70000 टन
  • थोरियम भंडार                                        लगभग 360000 टन

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